जेएनएन, चंडीगढ़। स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल द्वारा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आवास के बाहर दिए धरने को सियासी नाटक बताया है। उन्होंने कहा कि यदि सुखबीर को धरने का शौक है तो पंथक मुद्दे पर बरगाड़ी (फरीदकोट) में जाकर धरना दें। यदि वे ऐसा करते हैैं तो वे (सिद्धू) खुद इसमें शामिल होंगे।

सिद्धू ने कहा कि सुखबीर जब सत्ता में थे तब कहते थे जिन्हें घर में कोई नहीं पूछता, जिनके पास काम नहीं होता, वे धरना देने पहुंच जाते हैैं। अब वे किस मुंह से धरना दे रहे हैैं? बरगाड़ी में सुखबीर को बताना पड़ेगा कि श्री गुरु ग्रंथ साहब जी की बेअदबी क्यों हुई, डेरा प्रमुख की फि़ल्म कैसे रिलीज हुई, डेरा प्रमुख को कैसे माफी दी गई?

सिद्धू ने कहा कि जब अकाली दल सत्ता से बाहर होता है तो उसे 1984 के सिख विरोधी दंगे याद आ जाते हैं। नामधारी संप्रदाय के प्रमुख की माता की हत्या, ढडरियां वाले पर हमला, अपनी बेटी की इज्जत बचाने आए पुलिस अधिकारी की हत्या जैसी घटनाएं जब हुई थीं तब उन्होंने धरना क्यों नहीं लगाया?

नवजोत सिद्धू ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सुखबीर ख़ुद मंत्री रहे हैं और अब मोदी सरकार में उनकी धर्मपत्नी हरसिमरत कौर बादल मंत्री हैं। दोनों ने अपनी सरकार पर दबाव बनाकर 84 दंगों के दोषियों को सजा क्यों नहीं दिलाई? अब अगर केंद्र सरकार नहीं मानती तो हरसिमरत को मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि टकसाली अकाली नेताओं को अकाली दल से कोई गिला नहीं है, उनको जीजे-साले से नफरत है।

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