चंडीगढ़ , [इन्द्रप्रीत सिंह] । पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्‍त अध्‍यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की शुक्रवार को ताजपोशी होगी। उसके साथ ही चार कार्यकारी अध्‍यक्ष भी कार्यभार संभालेंगे। सिद्धू इस मौके पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को बुलाना चाहते हैं और इसके लिए कोशिश में जुटे हुए हैं। दरअसल प्रियंका को बुलाकर सिद्धू एक तीर से दो शिकार करना चाहते हैं। प्रियंका यदि आती हैं तो सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के लिए सिद्धू की ताजपोशी समारोह से दूर रहना मुश्किल हो जाएगा और उनके लिए दुविधा खड़ी हाे जाएगी। बता दें कि कैप्टन ने कहा है कि सिद्धू के बिना माफी मांगे वह उससे नहीं मिलेंगे।

कांग्रेस के सूत्रों ने बताया‍ कि नवजोत सिंह सिद्धू इस समारोह में प्रियंका गांधी को समारोह में बुलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा करने से सिद्धू एक तीर से दो निशाने साध सकते हैं। पहला यह कि यदि प्रियंका गांधी आती हैं तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को समारोह में आना पड़ेगा। दूसरा, पूरी पार्टी में यह संदेश जाएगा कि हाईकमान सिद्धू की बात नहीं टालती। ऐसे में सभी का उनके साथ चलना ही पड़ेगा।

लाल सिंह निभा सकते हैं कैप्टन को मनाने में भूमिका

 नवजोत सिंह सिद्धू के शुक्रवार को ताजपोशी समारोह से पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। पार्टी के उच्च स्तरीय सूत्रों के अनुसार मंत्रियों सुखजिंदर सिंह रंधावा व तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लाल सिंह से बात कर उन्हें कैप्टन को मनाने के लिए कहा जा रहा है।

 कांग्रेस कमेटी की ओर से नागरा आज लेकर जाएंगे कैप्टन के पास नए अध्यक्षों की ताजपोशी का न्यौता

वीरवार को कार्यकारी अध्यक्ष कुलजीत नागरा शिष्टमंडल के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह को समारोह का न्यौता देने जाएंगे। उनके साथ जाने वाले नेताओं के नाम अभी तय नहीं हुए हैं। सूत्रों के अनुसार किसी के अहं को चोट न पहुंचे इसलिए यह न्यौता कांग्रेस पार्टी की ओर से कैप्टन को दिया जाएगा न कि व्यक्तिगत तौर पर।

संकट काल में कैप्टन से मिले पूर्व मंत्री राणा, मिटने लगी दूरियां

कांग्रेस में पावर की खींचतान के बीच बुधवार को कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की। इस दौरान स्पीकर राणा केपी सिंह भी मौजूद थे। कैप्टन और राणा की यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद वह मुख्यमंत्री से दूर हो गए थे।

वह ऐसे विधायक हैं जो कैप्टन के साथ मन-मुटाव होने के बावजूद कांग्रेस की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के समक्ष कैप्टन के पक्ष में बोलकर आए थे। कैप्टन की ओर से विधायक सुखपाल खैहरा को कांग्रेस शामिल करने पर भी राणा काफी नाराज थे। एक समय यह चर्चा भी रही कि राणा कांग्रेस छोड़ सकते हैं, परंतु सिद्धू के साथ दूरियों के बीच राणा एक बार फिर कैप्टन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। मंत्रिमंडल छोड़ने से पहले वह कैप्टन के सबसे करीबी लोगों में शामिल रहे हैं।