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1 साल की उम्र में पोलियो, 80% दिव्यांगता... कैसे पंचकुला के नरेंद्र शास्त्री बने कलां स्कूल के प्रिंसिपल?

Published: Tue, 29 Sep 2026 08:33 AM (IST)

80% दिव्यांग नरेंद्र शास्त्री, 26 साल की सेवा के बाद रायपुर कलां स्कूल के प्रिंसिपल बने हैं। एक वर्ष की ...और पढ़ें

26 साल के संघर्ष की कहानी।

26 साल के संघर्ष की कहानी।

HighLights

  1. 80% दिव्यांग नरेंद्र शास्त्री बने रायपुर कलां स्कूल के प्रिंसिपल

  2. 26 साल की नियमित सेवा के बाद मिला प्रिंसिपल का पद

  3. बचपन में पोलियो से पीड़ित, परिवार के सहयोग से की पढ़ाई

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। वो कहते हैं न कि कुछ करने का जज्बा हो तो लाख कमियां भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसा ही प्रिंसिपल नरेंद्र शास्त्री ने कर दिखाया है।

उन्होंने 28 सितंबर को गवर्नमेंट माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल रायपुर कलां में पदभार ग्रहण किया। नरेन्द्र, जो पंचकूला के जटोली गांव के निवासी हैं, एक वर्ष की उम्र में पोलियो के शिकार हुए और 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं।

26 वर्षों का रहा प्रिसिंपल बनने का सफर

उन्होंने 1994 में चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में एडहाक के रूप में कार्य शुरू किया और 2000 में नियमित हो गए। 26 वर्षों की सेवा में टीजीटी से पीजीटी और अब प्रिंसिपल बने हैं।

परिवार ने हमेशा दिया नरेंद्र सिंह का साथ

नरेन्द्र का कहना है कि उनके भाइयों ने बचपन में उन्हें पढ़ाई के लिए हमेशा सहयोग दिया। वे उन्हें स्कूल ले जाने के लिए पीठ पर उठाते थे। 10वीं की पढ़ाई के बाद, उन्होंने अंबाला में हास्टल में रहकर शास्त्री का डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद बीएड की पढ़ाई की।

उन्होंने संघर्ष के महत्व को समझते हुए कहा कि आगे बढ़ने के लिए हमेशा मेहनत करनी पड़ती है। सोमवार को नरेन्द्र सहित आठ प्रिंसिपल ने ज्वाइन किया है।

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