जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेक्टर 32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक इमरजेंसी में शुक्रवार को एक महिला स्ट्रेचर से गिर गई। महिला के गिरते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में उसे उठाकर लिटाया गया। महिला को कमर और सिर में चोट लगी है। उस वक्त उसका 10 साल बेटा निखिल जिसका मेनिनजाइटिस का इलाज चल रहा है, ब्लड टेस्ट के लिए गया था। उस वक्त वहां न होने के कारण बच्चा सुरक्षित है। इस घटना से वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन डरे हुए हैं। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर एक स्ट्रेचर पर तीन-तीन बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। ऐसे में बच्चे की सुरक्षा के लिए परिजनों को भी स्ट्रेचर पर बैठना पड़ रहा है। इस तरह कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

15 की क्षमता भर्ती किए 60
अस्पताल की पीडियाट्रिक इमरजेंसी में 15 बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था है। लेकिन शुक्रवार को वहां 60 बच्चे भर्ती किए गए थे। इमरजेंसी की स्थिति यह थी कि स्ट्रेचर के कारण पैर रखने तक की जगह नहीं थी। तीन-तीन बच्चों को एक स्ट्रेचर पर भर्ती किया गया था। छोटे बच्चों के गिरने के डर से उनके परिजन उन्हें गोद में लेकर खुद स्ट्रेचर पर बैठे थे। ऐसी स्थिति के कारण ही स्ट्रेचर डिसबैलेंस हुआ और निखिल की मां गिर गई।

आए दिन होता है बवाल
बीमार बच्चों से खचाखच भरे वार्ड में महज तीन नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। परिजनों का कहना है कि गंभीर बच्चों के इलाज में लापरवाही बरती जाती है। 20 बच्चों पर महज एक नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं नर्सिंग स्टाफ काम के दबाव के बीच परिजनों के साथ रोज-रोज होने वाले तू तू-मैं मैं से परेशान हैं। उनका कहना है कि एक बच्चे को दवा-इंजेक्शन देने के दौरान 10 बच्चों के परिजन हमें घेरकर खड़े रहते हैं।

 

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