राजेश मलकानियां, पंचकूला। पंचकूला के मुख्य पर्यटन स्थल मोरनी जो एक पहाड़ी क्षेत्र भी है, अब वहां घूमने आने वाले लोगों को हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज देखने को मिलेंगे। ऐसे में अब मोरनी में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। यह हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज मोरनी के गांव समराल के एक कारोबारी ने शौकिया तौर पर अपनी जमीन पर रखे हैं।

समराल के कारोबारी जगदीप सिंह ने अपनी खाली जमीन पर शौक पूरा करने के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज खड़े किए हैं। इन दोनों हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर को वह अंदर से रेनोवेशन करवाकर अपने निजी कार्यक्रमों के लिए प्रयोग लाएंगे। यहां पर वह जन्मदिन, सालगिरह सहित त्योहारों पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ कार्यक्रम करेंगे। उन्होंने इनके व्यवसायिक प्रयोग करने की कोई फिलहाल कोई योजना नहीं बनाई है।

हवाई जहाज को पिछले 6 महीने से कारीगर जोड़ने में जुटे हुए थे।

यमुनानगर से लाए हेलीकॉप्टर और चेन्नई से हवाई जहाज

जगदीप सिंह ने बताया कि यहां पर कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। एयरफोर्स हेलीकॉप्टर यमुनानगर से और हवाई जहाज चेन्नई से लाया गया है। दो महीने पहले हेलीकॉप्टर एक ट्रक और 7 महीने पहले तीन ट्रकों में हवाई जहाज लगाया गया था। इस हवाई जहाज को पिछले 6 महीने से कारीगर जोड़ने में जुटे हुए थे। यह हवाई जहाज एक प्राइवेट एयरलाइंस का था, जोकि काफी पहले बंद हो गई थी। यह हेलीकॉप्टर मोरनी में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण बने हुए हैं। जिसको देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोग उसके अंदर जा-जाकर फोटो खिंचवा रहे। जगदीप सिंह इन दोनों की कीमत का खुलासा अभी नहीं करना चाहते हैं।

इन हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज को जगदीप खरीद कर लाए हैं।

मोरनी की तंग सड़कों से गांव तक पहुंचाना था मुश्किल

जगदीप सिंह ने बताया कि मोरनी की तंग सड़कों से इन हेलीकाॉप्टर और हवाई जहाज को गांव तक पहुंचाना मुश्किल था। क्योंकि बड़े ट्रक पर इन्हें लादकर लाया गया है और तंग सड़कों और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इन्हें पहुंचाना मुश्किल था। यह हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज चार ट्रकों में लादकर मोरनी में लाए गए हैं। अब ये लोगों के आकर्षण बन रहे हैं। 

वायुसेना पुराने जहाजों कर कर देती है रिटायर

भारतीय वायुसेना में जब हेलीकॉप्टर या लड़ाकू विमान ज्यादा पुराने हो जाता है, तो उन्हें रिटायर कर दिया जाता है। इसकी वजह उनके पुर्जों का न मिलना और रख-रखाव का खर्च ज्यादा आना है। रिटायरमेंट के बाद वायुसेना के इंजीनियर सारे जरूरी उपकरण निकाल लेते हैं, ताकी तकनीकी जानकारी किसी और के हाथ न लगे। ऐसे में सिर्फ उसका ढांचा ही बचा रह जाता है। जिसे अच्छी बोली लगाने वाले को नीलाम कर दिया जाता है। वायुसेना और नौसेना के जहाजों में बहुत ही मजबूत स्टील और अन्य धातुओं का इस्तेमाल होता है। जिससे वो गोलीबारी और मुश्किल हालात को आसानी से झेल सकें। वैसे आमतौर पर ज्यादातर को म्यूजियम में बदल दिया जाता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाया तो उसमें प्रयोग धातू को गलाकर उसे अलग से बेचा जाता है। राजेश मलकानियां

Edited By: Ankesh Thakur