जागरण संवाददाता, मोहाली : मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने सोमवार को फेज-4 स्थित नई लैब का उद्घाटन किया। यह लैब साइबर क्राइम में बढ़ रहे मामलों को रोकने में पुलिस का माध्यम बनेंगी। यहां बताने योग्य है कि डिजिटल जांच प्रशिक्षण व अध्ययन केंद्र (डीआइटीएसी) साइबर आतंकवाद के बढ़ रहे खतरे ़खास तौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और नशों की तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य की आतंकवाद विरोधी क्षमता मजबूत करेगी। साइबर क्राइम से ऑनलाइन निपटना भी जरूरी

देश की इस चौथे यूनिट की महता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नए उभर रहे साइबर खतरों के लिए ऑनलाइन तकनीकी का भी नया ढंग ढूंढ़ना जरूरी है। परंतु ऐसे तीन और यूनिट गुरुग्राम, गुवाहाटी और उत्तराखंड में स्थापित है। कैप्टन ने कहा कि भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य घुसपैठ और नशों की तस्करी जैसी गतिविधियों के पक्ष से संवेदनशील है। साइबर क्राइम के उभरने से गैर-रिवायती चुनौती खड़ी हुई है जिस कारण लोगों की सुरक्षा को ऑनलाइन यकीनी बनाने के लिए सभी तकनीकों को फिर से समीक्षा करना और अपनाना बहुत जरूरी है। कारगिल जंग के दौरान हुई थी स्थापना

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सेंटर पंजाब पुलिस व राष्ट्रीय तकनीकी खोज संस्था (एनटीआरओ) के दरमियान साझे उद्यम के तौर पर राज्य के साइबर क्राइम सेल में स्थापित किया गया है। इस केंद्र के साथ साइबर फोरेंसिक, सोशल मीडिया का अध्ययन और कथन के क्षेत्र में राज्य की चल रही तैयारियों को और बल मिलेगा। कारगिल में हुई घुसपैठ के दौरान राष्ट्रीय संस्था की स्थापना साल 2004 में की गई थी। यूनिट के साथ कानून की रक्षा करने वाली एजेंसिया साइबर स्पेस में समाज विरोधी तत्वों को प्रभावशाली ढंग से टक्कर देने में महारत का विकास करने के अलावा साइबर क्राइम की निगरानी के क्षेत्र में पुलिस मुलाजिमों को मानक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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