मोहाली में मां की मौत के बाद नहीं मिला बीमा क्लेम, LIC और PNB दोषी करार; अब देने होंगे 2.20 लाख
मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने एक महिला की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम का भुगतान न करने पर एलआईसी और ...और पढ़ें

जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला।
HighLights
बीमा पाॅलिसी मृत्यु के समय पूरी तरह वैध थी।
नामित व्यक्ति को बीमा लाभ देने से इनकार अनुचित।
नयागांव निवासी गौरव ने दर्ज कराई थी शिकायत।
जागरण संवाददाता, मोहाली। महिला की मौत के बाद उसके बेटे को वैध बीमा क्लेम का भुगतान न करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।
फोरम ने 2.20 लाख रुपये देने का फैसला सुनाया है। साथ ही स्पष्ट किया कि रिकाॅर्ड से यह साबित होता है कि बीमा पाॅलिसी मृत्यु के समय पूरी तरह वैध थी और नामित व्यक्ति को बीमा लाभ देने से इनकार करना अनुचित था।
मोहाली के नयागांव निवासी गौरव कुमार ने एलआईसी और पीएनबी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि उनकी मां स्वर्गीय राजरानी ने वर्ष 2015 में अपने बैंक खाते के माध्यम से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत दो लाख रुपये का बीमा कराया था, जिसका प्रीमियम स्वतः खाते से कटता रहा।
शिकायतकर्ता ने बैंक खाते के विवरण फोरम के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनमें नियमित प्रीमियम कटौती का रिकाॅर्ड दर्ज था। दस्तावेजों के अनुसार 24 मई 2022 को 342 रुपये और 18 जून 2022 को 436 रुपये की राशि बीमा प्रीमियम के रूप में काटी गई थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बीमा कवर सक्रिय था।
कई बार अनुरोध के बावजूद नहीं दिया क्लेम
राज रानी की 1 नवंबर 2022 को प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र गौरव कुमार ने एलआईसी और बैंक में बीमा क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कई बार अनुरोध के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। न तो क्लेम को स्वीकार किया गया और न ही अस्वीकृति का कोई कारण बताया गया, जिसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम में पहुंचा।
फोरम के समक्ष उपस्थित नहीं हुए
सुनवाई के दौरान दोनों विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन वे फोरम के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद 8 मई 2024 को उन्हें एकतरफा कार्यवाही में रखा गया। शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में शपथपत्र, बैंक रिकाॅर्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र और पीएमजेजेबीवाई योजना से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए।
फोरम ने सभी साक्ष्यों की जांच के बाद पाया कि पालिसी मृत्यु के समय वैध थी और प्रीमियम की नियमित कटौती से बीमा कवर सक्रिय होने की पुष्टि होती है। फोरम ने कहा कि योजना के नियमों के अनुसार नामित व्यक्ति को बीमा लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन विपक्षी पक्षों ने कोई जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
यह कहा फोरम ने फैसले में
फोरम ने इसे सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया। हालांकि शिकायतकर्ता ने मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 50 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन फोरम ने परिस्थितियों को देखते हुए 20 हजार रुपये का मुआवजा उचित माना।
अंत में फोरम ने एलआईसी और पंजाब नेशनल बैंक को आदेश दिया कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का भुगतान करें। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 20 हजार रुपये अलग से देने होंगे। इस प्रकार कुल 2.20 लाख रुपये का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।