यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हड्डियों की बीमारी की दवाएं कर रहीं लोगों के दांत व जबड़ा कमजोर
यदि आप हड्डियों के रोग की दवा ले रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। इन दवाओं से ...और पढ़ें

चंडीगढ़, [डॉ. रविंद्र मलिक]। अगर आप हड्डियों की बीमारी से पीडि़त हैं और दवा का सेवन कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इन दवा के सेवन से आपका जबड़ा और दांत कमजोर हो सकते हैं। यह खुलासा पीजीआइ चंडीगढ़ की शोध में हुआ है। शोध के अनुसार, 100 में से 13 मरीजों को यह समस्या हाे रही है।
पीजीआइ की रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा- जबड़े और मसूड़े कमजोर होने से गिर रहे दांत
हड्डियों में कमजोरी की बीमारी से जूझ रहा हर सातवां रोगी दांतों में कमजोरी की समस्या से भी पीडि़त है। हड्डियों की कमजोरी को ओस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। हड्डियों के रोगों से पीडि़त लोगों को दांतों की बीमारी होने का रिस्क भी कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा कई ऐसे मरीज होते हैं जिनको साइड इफेक्ट के चलते दूसरे रोग हो जाते हैं। मरीज की हिलिंग केपेसिटी घट जाती है। जबड़े कमजोर हो जाते हैं। दांतों में कमजोरी से इंफेक्शन हो जाता है और मवाद भी बनने लगता है।
मरीजों का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड भी खंगाला गया
पीजीआइ में 16 मरीजों की केस स्टडी में यह खुलासा हुआ कि ओस्टियोपोरोसिस के इलाज में ली जाने वाली दवा दांतों पर भी बुरा असर डालती है। इन मरीजों का पिछला ट्रीटमेंट ट्रैक किया गया। फिर दवा का अध्ययन किया गया। पाया गया कि इनके दुष्प्रभाव से मसूड़े कमजोर हो गए और दांतों में गैप आ गया।
इलाज से पहले ट्रीटमेंट हिस्ट्री जरूर बताएं
डॉ. सचिन व सतनाम ने बताया कि किसी भी बीमारी का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर को पूर्व ट्रीटमेंट हिस्ट्री जरूर बताएं। अगर पहले कोई बीमारी रही है तो ऐसा करने से डॉक्टर शरीर पर दुष्प्रभाव डालने वाली दवा से आपको बचा सकता है। डॉक्टर मरीज की पूर्व ट्रीटमेंट हिस्ट्री के आधार पर मरीज का नया ट्रीटमेंट शुरू करता है।

इन दो दवाओं ने डाला असर
हड्डियों की कमजोरी दूर करने के लिए कई तरह की दवा इस्तेमाल की जाती है। बिस्फोस्फोनेट और डेनोसुनेव दवा के शरीर पर गलत प्रभाव डालने की जानकारी रिसर्च में सामने आई है। इनसे दांतों में कमजोरी की बात सामने आई। कई रोगी ऐसे होते हैं जिनको दवा से दिक्कत होने लगती है। ऐसे मरीजों को डेंटल विभाग में शिफ्ट करना पड़ता है।
रक्त का संचार कम हो जाता है
ओस्टियोपोरोसिस के इलाज के लिए ली जा रही दवा के लगातार सेवन से मसूड़ों में रक्त संचार कम हो जाता है। मुंह के अंदर की हड्डियों की सेल भी कमजोर होने लगते हैं। मसूड़ों में इंफेक्शन होने के चांस पहले की तुलना में बढ़ जाते हैं।

-----
'' हर 100 में से 13 मरीज ऐसे हैं, जिन पर हड्डियों के इलाज के लिए ली जा रही दवा के साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। रोगी को पहले ही बता देना चाहिए कि कौन सी बीमारी की वे दवा ले रहे हैं।
- डॉ. सचिन और डॉ. सतनाम, ओरेल हेल्थ साइंस विभाग, पीजीआइ चंडीगढ़।
