इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। Punjab Assembly Special Session: पंजाब सरकार की ओर से आज होने जा रहे  विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा विश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर सोमवार को भी स्थिति साफ नहीं हो पाई। सत्तारूढ़ पार्टी ने फिलहाल अपने विधायकों को सदन में हाजिर रहने के लिए व्हिप जारी नहीं किया है लेकिन सत्र शुरू होने से पहले विधायकों की बैठक बुला ली है। जानकारों का कहना है कि सरकार सदन में विश्वास प्रस्ताव जरूर लाएगी।

मुख्यमंत्री के विश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर असमंजस, सत्र से पहले बुलाई विधायक दल की बैठक

अभी तय नहीं है कि यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री लाएंगे या किसी विधायक के जरिए लाया जाएगा। यह तय है कि विधानसभा सत्र हंगामापूर्ण होगा। विपक्ष जानता है कि जीएसटी, बिजली और पराली के मुद्दे पर भले ही सत्र बुलाया गया है लेकिन सरकार इसकी आड़ में विश्वास प्रस्ताव जरूर लेकर आएगी।

सूत्रों के अनुसार विधायकों को आपरेशन लोटस के तहत 25-25 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदने का आरोप लगाकर विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस करवाई जाएगी। उसके बाद मुख्यमंत्री इस पर विश्वास प्रस्ताव रख सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि अगर ऐसा कुछ हुआ तो मुख्यमंत्री को सुने बगैर विपक्षी पार्टियां उनके भाषण का बहिष्कार कर सकती हैं।

कांग्रेस कर सकती है सत्र का बहिष्कार और भाजपा जनता विधानसभा लगाकर जताएगी विरोध 

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इस बारे में पहले ही स्पष्ट कर दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी अलग से माक सेशन (जनता विधानसभा) चलाने की घोषणा कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि जब 22 सितंबर को विशेष सत्र बुलाया जा रहा था तो उसके लिए आम आदमी पार्टी की चीफ व्हिप प्रो बलजिंदर कौर ने विधायकों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया था,  लेकिन सोमवार के सत्र के लिए ऐसा नहीं किया गया है। लेकिन, सदन के शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों की बैठक बुला ली है। यानी कि बहुत कुछ छिपाकर रखा जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा का कहना है कि मंगलवार के सत्र से पंजाब को कुछ भी हासिल नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार सत्र को और बढ़ाने को लेकर चर्चा भी चल रही है। सरकार इसे दो दिन तक बढ़ाना चाहती है। लोक संपर्क मंत्री अमन अरोड़ा ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि सत्र बढ़ाने या विश्वास प्रस्ताव लाने संबंधी वह कुछ नहीं बता सकते। यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में तय होगा।

उल्लेखनीय है कि विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर पिछले एक सप्ताह से सरकार और राजभवन में वाकयुद्ध जारी रहा। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित द्वारा सरकार की ओर से विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 22 सितंबर को बुलाया विशेष सत्र रद करते ही राजनीति शुरू हो गई थी। राज्यपाल के विशेष सत्र को रद करने के फैसले के बाद सरकार ने 27 सितंबर को रेगुलर सत्र बुलाया है। -

बीएसी की बैठक में नहीं बुलाया भाजपा को

विधानसभा द्वारा सत्र के लिए जारी किए गए कार्यक्रम में सबसे पहले बिछड़े नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी। उसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक होगी। दिलचस्प बात यह है कि बिजनेस एडवाजइरी कमेटी की बैठक में सभी पार्टियों के विधायक शामिल होते हैं, लेकिन इसमें भारतीय जनता पार्टी के दोनों विधायकों को नहीं बुलाया गया है, जबकि बहुजन समाज पार्टी का केवल एक विधायक है और उसे विशेष निमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया है।

इस बैठक में स्पीकर कुलतार ¨सह संधवां , वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा, संसदीय कार्य मंत्री इन्द्रबीर सिंह निज्जर, लोकसंपर्क मंत्री अमन अरोड़ा, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, शइरोमणि अकाली दल के विधायक दल के नेता मनप्रीत सिंह अयाली को बुलाया गया है। 

Edited By: Sunil Kumar Jha

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट