पंजाब में DA एरियर पर बड़ा अपडेट, सरकार ने स्वीकारी 22,818 करोड़ की देनदारी; कर्मचारियों को मिलेगा 6% ब्याज
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया की देनदारी लगभग 32,418 करोड़ रुपये है।

पंजाब पर 22,818 करोड़ रुपये के डीए एरियर का बोझ, हाई कोर्ट में सरकार ने दिया हिसाब-किताब।
HighLights
पंजाब सरकार पर 32,418 करोड़ रुपये डीए बकाया देनदारी
हाईकोर्ट के आदेश पर 6% ब्याज सहित भुगतान स्वीकार
डीए बकाया भुगतान मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया भुगतान का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
राज्य सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया है कि एक जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2026 तक के डीए और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया की देनदारी करीब 22,818 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।
इतना ही नहीं, यदि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान दर से महंगाई भत्ता दिया जाता है तो सरकारी खजाने पर हर साल 4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से हाई कोर्ट में दायर रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों दावों को मिलाकर राज्य की कुल लंबित देनदारी लगभग 32,418 करोड़ रुपये है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट के तीन अगस्त के फैसले पर अमल करना उसकी जिम्मेदारी है। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अब तक कोई रोक नहीं लगाई है।
मुख्य सचिव ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का बकाया छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देना होगा। यानी भुगतान में देरी के बावजूद राज्य सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वेतन और पेंशन पर पंजाब सरकार का सालाना खर्च करीब 58,064 करोड़ रुपये रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी बकाया राशि का भुगतान करने के लिए सरकार को बजट में विशेष प्रावधान करना होगा।
मुख्यमंत्री की बैठक के बाद आठ प्रतिशत बढ़ाया था डीए
सरकार ने अदालत को बताया कि कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों पर 18 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें महंगाई भत्ते में आठ प्रतिशत वृद्धि का निर्णय लिया गया।
इसके बाद 23 सितंबर को वित्त विभाग ने आदेश जारी कर डीए की दर 42 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी। बढ़ी हुई दर एक सितंबर 2026 से लागू की गई। इसका लाभ सितंबर के वेतन और पेंशन में अक्टूबर के दौरान दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, देरी को बताया गैर इरादतन
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के तीन अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसके लिए एक सितंबर को विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कुछ प्रक्रियागत खामियां बताईं, जिसके बाद एक अक्टूबर को याचिका दोबारा दाखिल की गई।
सरकार ने भुगतान में देरी को जानबूझकर की गई अवहेलना मानने का विरोध किया। उसका कहना है कि वह कानूनी उपाय के तहत सुप्रीम कोर्ट गई है और देरी के लिए हाई कोर्ट के आदेश में छह प्रतिशत ब्याज का प्रावधान पहले से मौजूद है।
मुख्य सचिव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार हाई कोर्ट के आदेशों का सम्मान करती है और कर्मचारियों व पेंशनरों को छह प्रतिशत ब्याज सहित बकाया देने की देनदारी स्वीकार करती है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।