'लड़की के गायब होने से दुष्कर्म तक...', 2 यूनिवर्सिटीज में अलग-अलग मैसेज से बवाल, अब पहली पोस्ट की तलाश में पुलिस
चितकारा और एलपीयू में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के कारण छात्रों का पुलिस से टकराव और हाईवे जाम जैसी ...और पढ़ें
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इंटरनेट मीडिया संदेशों के स्रोत की जांच जारी।
HighLights
चितकारा में लड़की की मौत/गायब होने की अफवाह पर छात्रों का हंगामा
एलपीयू में दुष्कर्म के आरोपों पर छात्रों ने नेशनल हाईवे जाम किया
पुलिस वायरल संदेशों के स्रोत की जांच में जुटी
रोहित कुमार, चंडीगढ़। शुक्रवार को चितकारा यूनिवर्सिटी और शनिवार को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुए घटनाक्रम ने इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दोनों यूनिवर्सिटी में अलग-अलग मैसेज वायरल हुए और दोनों जगह उसका असर कैंपस से बाहर तक दिखाई दिया। चितकारा यूनिवर्सिटी में लड़की की मौत या गायब होने से जुड़ी अफवाहें वायरल होने के बाद स्टूडेंट का पुलिस से टकराव हुआ और पुलिस वाहन के शीशे तोड़ दिए गए। वहीं, एलपीयू में लड़की से दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा मैसेज वायरल होने के बाद तड़के स्टूडेंट ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों मामलों में वायरल हुई सूचनाएं सबसे पहले किसने इंटरनेट मीडिया पर डालीं और उन्हें इतनी तेजी से किस नेटवर्क के माध्यम से फैलाया गया।
दोनों घटनाओं में अभी तक ऐसा कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि दोनों मैसेज के पीछे एक ही व्यक्ति या नेटवर्क था। यही वजह है कि जांच का फोकस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय दोनों मैसेज की अलग-अलग डिजिटल कड़ियां तलाशने पर है।
एलपीयू मामले में पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है, जबकि चितकारा यूनिवर्सिटी मामले में फिलहाल एफआइआर दर्ज नहीं की गई है।
चितकारा में लड़की की मौत और गायब होने की फैली अफवाह
शुक्रवार को चितकारा यूनिवर्सिटी में इंटरनेट मीडिया पर अचानक ऐसी सूचनाएं फैलने लगीं कि कैंपस में किसी लड़की के साथ अनहोनी हुई है। कुछ मैसेज में लड़की की मौत और कुछ में उसके गायब होने की बात कही गई। इसके अलावा एक व्यक्ति के पंडित के वेश में लड़की से मिलने आने की बात भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की गई।
इन संदेशों के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में स्टूडेंट के बीच तनाव बढ़ गया। मौके पर पहुंची पुलिस के साथ कुछ स्टूडेंट की हाथापाई हुई। पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। कुछ स्टूडेंट ने वीडियो बनाकर पुलिसकर्मियों पर शराब पीने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।
घटना के बाद चितकारा यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर इंटरनेट मीडिया पर चल रही सूचनाओं को गलत और बेबुनियाद बताया। प्रबंधन के अनुसार कैंपस में न तो किसी लड़की की मौत हुई और न ही किसी लड़की के गायब होने की घटना हुई।
जिस व्यक्ति को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रही थीं, वह छात्रा का अभिभावक था। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि कोई भी माता-पिता या परिजन अपनी बेटी से मिलने यूनिवर्सिटी आ सकता है।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने स्टूडेंट से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस की गाड़ी तोड़ने और पुलिसकर्मियों से हाथापाई के मामले में पुलिस की ओर से अलग कार्रवाई की बात सामने आई है।
अगले दिन एलपीयू में दुष्कर्म का मैसेज
चितकारा की घटना के अगले ही दिन शनिवार को एलपीयू में अलग तरह का मैसेज इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें एक लड़की से दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ी जानकारी प्रसारित की गई। मैसेज फैलते ही स्टूडेंट में आक्रोश बढ़ गया और मामला कैंपस से निकलकर नेशनल हाईवे तक पहुंच गया।
तड़के करीब चार बजे स्टूडेंट ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया। इसका असर दोनों तरफ के यातायात पर पड़ा। लवली यूनिवर्सिटी से लेकर रामा मंडी होते हुए पीएपी के पास तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम दूर तक पहुंचने के कारण पुलिस को यातायात सामान्य करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्ट करना शुरू किया। रामा मंडी की तरफ आने वाले ट्रैफिक को होशियारपुर रोड की तरफ भेजा गया। इसी तरह जालंधर से कैंट की तरफ जाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से कैंट के रास्ते नकोदर होते हुए हाईवे पर भेजा गया। स्टूडेंट का धरना खबर लिखे जाने तक जारी था।
एलपीयू ने बताया मैसेज झूठा और मनगढ़ंत
एलपीयू की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने इंटरनेट मीडिया पर फैल रही सूचनाओं को लेकर बयान जारी किया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से झूठी, बेबुनियाद और मनगढ़ंत अफवाहें फैला रहे हैं। इससे स्टूडेंट के बीच भ्रम पैदा हो रहा है और यूनिवर्सिटी के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है।
यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि जिस तरह से यह जानकारी व्यवस्थित तरीके से फैलाई जा रही है, उससे यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की आशंका पैदा होती है।
हालांकि यूनिवर्सिटी ने साफ किया कि वर्तमान में चल रही अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। स्टूडेंट, अभिभावकों और आम लोगों से केवल यूनिवर्सिटी के आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई।
अब जांच के केंद्र में मैसेज की पहली कड़ी
दोनों मामलों में सबसे अहम सवाल अब यह है कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल मैसेज की शुरुआत कहां से हुई। पुलिस और साइबर सेल यह पता लगाने में जुटे हैं कि सबसे पहले किस नंबर, अकाउंट या ग्रुप से संदेश सामने आया। इसके बाद संदेश किन-किन ग्रुप और अकाउंट तक पहुंचा, इसे भी डिजिटल तरीके से खंगाला जा रहा है।
एलपीयू मामले में एफआइआर दर्ज होने के बाद जांच को कानूनी आधार भी मिल गया है। वायरल मैसेज, उसके स्क्रीनशॉट और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
वहीं चितकारा मामले में एफआइआर दर्ज नहीं होने के बावजूद पुलिस के सामने कैंपस में हुए हंगामे और वायरल दावों की वास्तविकता का पता लगाने की चुनौती है।
क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दोनों घटनाओं में अलग-अलग मैसेज वायरल होने के बावजूद उनका असर इतना तेज क्यों हुआ। क्या यह केवल अफवाहों के तेजी से फैलने का परिणाम था या किसी ने जानबूझकर ऐसी सूचनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया? फिलहाल इसका कोई पुष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसियां दोनों मामलों के संदेशों को अलग-अलग ट्रैक कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि मैसेज की भाषा, उसके प्रसार का समय, शुरुआती अकाउंट और उसे आगे भेजने वाले ग्रुप में कोई समानता है या नहीं। जब तक डिजिटल जांच पूरी नहीं होती, तब तक दोनों घटनाओं को किसी एक साजिश से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
लेकिन लगातार दो दिन दो यूनिवर्सिटी में अलग-अलग वायरल मैसेज के बाद स्टूडेंट का सड़क पर उतरना पुलिस के लिए जरूर नई चुनौती है। अब पूरी नजर उस पहली डिजिटल कड़ी पर है, जहां से दोनों मामलों के अलग-अलग मैसेज की शुरुआत हुई। यही कड़ी बता सकती है कि ये संदेश महज अफवाह थे, गलत सूचना थी या इन्हें योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया।
