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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 29, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'आधार' ने दो साल बाद मां-बाप से मिलवाया जिगर का टुकड़ा

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Sat, 29 Jul 2017 12:05 PM (IST)Updated: Sat, 29 Jul 2017 01:00 PM (IST)

आधार कार्ड ने दो साल बाद गुम हुए बच्चे को मां-बाप से मिलवा दिया। दरअसल, जब बच्चे का आधार बनवाने ...और पढ़ें

'आधार' ने दो साल बाद मां-बाप से मिलवाया जिगर का टुकड़ा
'आधार' ने दो साल बाद मां-बाप से मिलवाया जिगर का टुकड़ा

जेएनएन, मोहाली। दो साल पहले अपने माता-पिता से बिछड़ा मासूम शुक्रवार को आधार कार्ड के जरिए माता-पिता को मिल गया। राजस्थान का 12 वर्षीय मासूम विष्णु के माता-पिता वर्ष 2015 में पंजाब में किसी काम से आए थे, जहां विष्णु गुम हो गया था। रेलवे पुलिस को विष्णु लुधियाना रेलवे पुलिस स्टेशन के पास मिला, जिसे बाल कल्याण कमेटी लुधियाना के आदेश पर उसे चिल्ड्रन होम दुसारना भेजा गया, जहां उसका दाखिला सरकारी स्कूल में करवाया गया था।

स्कूल की ओर से जब आधार कार्ड के लिए आवेदन करवाया गया तो, उसका आधार पहले से बना हुआ पाया गया, जिसकी वजह से उसके राजस्थान का निवासी होने का पता चला। मोहाली प्रशासन ने उसके आधार के माध्यम से जांच पड़ताल कर उसके मां-बाप तक संदेशा भिजवाया। संदेशा पाकर माता-पिता शुक्रवार को मोहाली आए तो अपने खोए हुए बेटे को वापस पाकर उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटा भी अपने मां-बाप के गले लगकर फूले नहीं समा रहा था।

राजस्थान का नंहू निवासी विष्णु (12) दो साल पहले अपने परिजनों से बिछड़ गया था। विष्णु के मां बाप उसे ढूंढने के लिए देश का कोना कोना छान रहे थे, जबकि वह भटकते हुए पंजाब सीमा में आ गया था।

रेलवे पुलिस को लुधियाना में मिला था बच्चा

चिल्ड्रन होम की सुपरिटेंडेंट जसबीर कौर ने बताया कि विष्णु 2015 में रेलवे पुलिस को रेलवे पुलिस स्टेशन लुधियाना में मिला था, जिसके बाद बाल कल्याण कमेटी लुधियाना के आदेश पर उसे चिल्ड्रन होम दुसारना भेजा गया। पिछले साल स्कूल प्रशासन की ओर से विष्णु का आधार कार्ड बनवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया तो नामंजूर हो गया।

इसके बाद चंडीगढ़ के रिजनल ऑफिस ऑफ यूआइडीएआइ के साथ संपर्क किया तो पता चला कि विष्णु के बायोमेट्रिक्स गांव नंहू जिला भरतपुर राजस्थान के साथ मेल खा रहे है। इसके बाद यह जानकारी भरतपुर सेंटर को दी गई।

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