चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। बचपन से आप पढ़ते आए होंगे ठ से ठठेरा। यानी बर्तन बनाने वाला। इसे सोचकर आपके जहन में जो तस्वीर उभरती है, वो आज के ठठेरों से काफी अलग है। किसी ने शायद ही सोचा होगा कि आज के ठठेरे युवाओं के लिए स्टार्टअप बन सकतेे हैं। आधुनिकता के दौर में लुप्त हो रहे ठठेरों की क्षमता को पहचाना पंचकूला की रहने वाली युवा कीर्ति गोयल ने। नई दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने वाली कीर्ति अब पीतल के बर्तनों की डिजाइनिंग कर रही हैं। कीर्ति ने पी-टैल के नाम से अपनी कंपनी भी रजिस्टर्ड करवा ली है।

प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन (Progressive Punjab Investors Conference) में कीर्ति का स्टॉल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यह सब कुछ इतना आसान भी नहीं था। कीर्ति ने पीतल के बर्तन पर एक वर्ष तक शोध किया। अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु के ठठेरों को 2014 में यूनेस्को ने मान्यता दी थी। कार्ति ने उनका बारीकी से अध्ययन किया। एक ठठेरे के साथ कीर्ति ने काम शुरू किया और आज उसके डिजाइन किए हुए बर्तनों की बिक्री कनाडा में भी हो रही है।

दो साल में 26 लाख तक पहुंचा कारोबार

24 वर्षीय कीर्ति ने सात लाख रुपये की लागत से अपनी कंपनी की स्थापना की। दो वर्षों में ही उनकी कंपनी 26 लाख के कारोबार तक पहुंच चुकी है। आज उसके बनाए हुए जग, गिलास, चाय के कप और पीतल का नल लगा हुआ घड़ा लोगों को आकर्षित कर रहा है। कीर्ति के अनुसार आम लोगों में धातु के बर्तन को लेकर जागरूकता आई है। क्योंकि प्लास्टिक, एल्युमीनियम व बोन चाइना आदि के साइड इफेक्ट को लेकर लोगों को पता चलना शुरू हो गया है। बाजार में बदलाव आने में वक्त लगेगा, लेकिन मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है।

लोगों को भा रहे नए डिजाइन

कीर्ति कहती हैं कि दो वर्ष पहले मैंने एक ठठेरे के साथ काम शुरू किया था। अब मैं छह ठठेरों से काम करवा रही हूं। कीर्ति के डिजाइन किए हुए बर्तन की खासियत यह है कि वह तांबा व पीतल को मिलाकर बर्तन तैयार कर रही हैं। वे पारंपरिक डिजाइन की जगह नए डिजाइन पेश कर रही हैं। ये बर्तन लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहे हैं। विदेश से भी मांग आ रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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