जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : कोरोना मरीजों को बचाने के लिए प्रशासन ने शहर की एनजीओ और संगठनों से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मांगे हैं। इस समय स्थिति यह है कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर ही बाजार में उपलब्ध नहीं है। शहर की कई संस्थाएं यह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर प्रशासन को देना चाहते हैं लेकिन या तो यह उपलब्ध नहीं है या फिर से तीन गुना रेट पर यह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिल रहे हैं। फासवेक के पदाधिकारियों ने बताया कि वह दस ऑक्सीजन कंसंट्रेटर प्रशासन को देना चाहते हैं। सेक्टर-21 के डाक्टर संजीव भाटिया भी फासवेक के साथ मिलकर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देना चाहते हैं। भाटिया ने बताया कि दस लीटर वाला ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बाजार में काफी महंगा मिल रहा है और दस लीटर वाला ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर ही कोरोना मरीज के लिए मददगार साबित होता है। पांच लीटर वाला ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इतना फायदा नहीं है। फासवेक अध्यक्ष बलजिदर सिंह बिट्टू का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि खुद ही वाजिब रेट पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध करवा दे। दो माह पहले एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 20 से 25 हजार रुपये में मिल जाता था जो कि अब 60 से 70 हजार खर्च करने के बावजूद भी नहीं मिल रहे हैं।

कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए मांगा था स्कूल

फासवेक अध्यक्ष बलजिदर सिंह बिट्टू का कहना है कि उन्होंने दस दिन पहले प्रशासन को पत्र लिखा था कि उन्हें एक स्कूल उपलब्ध करवाया जाए जहां पर वह 25 बेड का कोविड केयर सेंटर बना सके लेकिन प्रशासन की ओर से उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। नोडल अधिकारी को भी फोन किया है।

सेवा भारती ने सौंपे दस ऑक्सीजन कंसंट्रेटर

सेवा भारती ने सेक्टर-24 स्थित इंदिरा हॉली-डे होम में कम्पीटेंट फाउंडेशन और भारत विकास परिषद के चलाए जा रहे कोविड केयर सेंटर को 10 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सौंपे है। सेवा भारती के अध्यक्ष अमृत सागर ने बताया कि इंदिरा हॉली-डे होम में कोविड केयर सेंटर चलाने वाले कम्पीटेंट फाउंडेशन के चेयरमैन संजय व भारत विकास परिषद के चेयरमैन अजय दत्ता को यह कंसंट्रेटर सौंपे हैं।

18 साल से ऊपर वैक्सीन लगाने की दी जाए मंजूरी

बलजिदर सिंह बिट्टू ने प्रशासन से पत्र लिखकर कहा कि वह एक सप्ताह से सेक्टर-21 सी के प्राचीन शिव मंदिर और गुरुद्वारा साहिब में वैक्सीनेशन कैंप लगा रही है। उनके यहां पर 45 साल के ऊपर की आयु वालों के लिए जो कैंप लगे हैं उनमें नियमों का ध्यान रखा जा रहा है। अगर उन्हें 18 प्लस वैक्सीन लगाने की मंजूरी दी जाती है तो प्रशासन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। डाक्टरों और स्टॉफ की व्यवस्था भी वह खुद कर लेंगे।

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