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IDFC बैंक फ्रॉड! करोड़ों रुपये रिश्वत लेकर अफसरों ने खुलवाए खाते; आरोपित रिमांड पर, क्रेस्ट के 75 करोड़ गबन के खुलेंगे राज

Published: Tue, 24 Mar 2026 07:11 PM (IST)

चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े करोड़ों के घोटाले में नया खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध शाखा ने कोर्ट ...और पढ़ें

ईओडब्ल्यू ने आरोपितों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर सात दिन का रिमांड हासिल किया है।

ईओडब्ल्यू ने आरोपितों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर सात दिन का रिमांड हासिल किया है।

HighLights

  1. तीन आरोपितों को प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया चंडीगढ़।

  2. फर्जी एफडीआर और शेल कंपनियों से करोड़ों का गबन।

  3. पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट के बैंक खातों के जरिये करोड़ों के घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कोर्ट को बताया कि तीन बैंक अधिकारियों ने खाते खुलवाने के बदले स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट अफसरों को करोड़ों रुपये रिश्वत दी। 

ईओडल्यू ने बैंक मैनेजर रिभव ऋषि, रिलेशनशिप मैनेजर अभय सिंह और उ उसकी पत्नी स्वाति सिंगला को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर सात दिन का रिमांड हासिल किया है। इससे पहले ये आरोपित हरियाणा में न्यायिक हिरासत में थे। ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपितों और मास्टरमाइंड रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की।

 

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) के अधिकारियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया था। घोटाले को अंजाम देने के लिए तीन शेल कंपनियां बनाई गईं। नगर निगम और क्रेस्ट के फंड में गड़बड़ी की गई।

आरोप है कि रिभव ऋषि ने अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) तैयार कर करीब 18 लाख रुपये नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की रकम को डायवर्ट किया।

पुलिस ने अदालत में यह भी बताया कि आरोपी रिभव ऋषि ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि उसने बैंक में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकारी खातों से रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया।

इसके अलावा, सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा में क्रेस्ट के खाते भी संदिग्ध तरीके से खोले गए थे, जिनमें लगभग 75 करोड़ की रकम जमा थी। पुलिस का मानना है कि यह पूरा घोटाला बैंक कर्मचारियों और कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।