सिर्फ FIR से नहीं रुक सकती ग्रेच्युटी, हाई कोर्ट का फैसला; पंजाब सरकार को ब्याज सहित भुगतान का आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर लंबित होने के आधार पर ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती। ...और पढ़ें

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HighLights
एफआईआर से ग्रेच्युटी रोकना अवैध, हाई कोर्ट का स्पष्टीकरण।
सेवानिवृत्ति लाभ कर्मचारी का वैधानिक और मूल्यवान अधिकार है।
पंजाब सरकार को देरी पर 6% वार्षिक ब्याज चुकाने का आदेश।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल एफआईआर दर्ज होने या उसके लंबित रहने के आधार पर किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि जब तक आपराधिक अदालत में चालान (चार्जशीट) पेश नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभ रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी की ग्रेच्युटी के भुगतान में हुई देरी पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। जस्टिस नमित कुमार ने अपने फैसले में कहा, रिटायरमेंट लाभ किसी प्रकार की कृपा या अनुग्रह नहीं हैं, बल्कि यह कर्मचारी का एक मूल्यवान वैधानिक अधिकार है। किसी कर्मचारी को कानून के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के अलावा इन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
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2011 में सेवानिवृत्त हुए थे ASI
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता 28 फरवरी 2011 को पंजाब पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी 5,50,869 रुपये की ग्रेच्युटी इस आधार पर रोक ली गई थी कि उनके खिलाफ 19 फरवरी 2007 को मोहाली के फेज-8 थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 341 और 368 सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने इस मामले में 12 जुलाई 2007 को ही कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी थी, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी ग्रेच्युटी जारी नहीं की गई। बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मोहाली ने 1 जुलाई 2014 को कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार की। इसके बाद 13 अक्टूबर 2014 को ग्रेच्युटी मंजूर हुई और 1 जनवरी 2015 को उसका भुगतान किया गया। याचिकाकर्ता ने करीब चार वर्ष की देरी के लिए ब्याज की मांग की।
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सरकार ने आपराधिक मामले का दिया हवाला
राज्य सरकार ने दलील दी कि आपराधिक मामला लंबित होने के कारण ग्रेच्युटी जारी नहीं की जा सकती थी और कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद बिना अनावश्यक देरी के भुगतान कर दिया गया। रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी की ग्रेच्युटी केवल एफआईआर लंबित होने के कारण रोकी गई थी, जबकि सेवानिवृत्ति से काफी पहले कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत में दाखिल हो चुकी थी।
जस्टिस नमित कुमार ने कहा, 'केवल एफआईआर लंबित होना और आरोपी के खिलाफ आरोप तय न होना, कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभ रोकने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में सेवानिवृत्ति की तिथि तक कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत में दाखिल थी। ऐसे में ग्रेच्युटी रोकने का न तो कोई कानूनी अवरोध था और न ही कोई औचित्य।'
6% ब्याज के साथ भुगतान का आदेश
हाई कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक कार्यवाही की शुरुआत तभी मानी जाती है, जब सक्षम अदालत में चालान या चार्जशीट पेश की जाती है। केवल एफआईआर दर्ज होना या उसका लंबित रहना रिटायरमेंट लाभ रोकने का अधिकार नहीं देता।
याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को 1 मई 2011 से 1 जनवरी 2015 तक ग्रेच्युटी की देरी से अदायगी पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने तथा आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
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