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जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस एसएस सरों व जस्टिस अवनीश झिंगन पर आधारित डिविजन बेंच ने पंजाब के बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह को हटाने की एक याचिका को चीफ जस्टिस को रेफर कर दिया है। बेंच ने इस मामले की सुनवाई से निजी कारणों से हटते हुए चीफ जस्टिस से आग्रह किया कि वो इस मामले को अन्य बैंच को सुनवाई के लिए दें।

मामले में हाई कोर्ट के वकील एचसी अरोड़ा ने दायर याचिका में आरोप लगाया था कि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन राणा के अधीन आता है। उसको बिजली सप्लाई करने वाली एक पावर कंपनी में राणा के परिवार के लोगों के अधिकतम शेयर है। अरोड़ा के अनुसार राणा गुरजीत सिंह और उनकी पत्नी राणा राजबंस कौर शुगर मिल के मुख्य हिस्सेदार हैं।

इस कंपनी का 4 दिसंबर 2012 को पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमटेड के साथ 20 मेगावॉट बिजली कि सप्लाई किए जाने का समझौता हुआ हैं। समझौता 4 दिसंबर 2027 तक के लिए किया गया है। ऐसे में जब राणा गुरजीत सिंह खुद ऊर्जा मंत्री बन गए हैं तो पीएसपीसीएल अब उनके तहत ही आ जाती है और उनकी कंपनी का पीएसपीसीएल से समझौता है। लिहाजा, ऐसे में राणा गुरजीत सिंह का ऊर्जा मंत्री बने रहना सही नहीं है। यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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