राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब की नई एक्साइज पालिसी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर पंजाब सरकार हाई कोर्ट के नोटिस का जवाब नहीं दे पाई। सरकार की तरफ से कोर्ट से आग्रह किया गया कि इस बाबत जवाब दायर करने के लिए उसे कुछ समय दिया जाए।

पंजाब सरकार ने राज्य में शराब की खरीद और बिक्री के लिए साल 2022 -23 के लिए जो एक्साइज पालिसी जारी की है उसके खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर इस पालिसी को चुनौती दी गई है। इस मामले में हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री , एक्साइज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व एक्साइज कमिश्नर को जारी कर जवाब तलब किया था।

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की तरफ से हाई कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में उसे जवाब देने के लिए कुछ समय दिया जाए। इस पर कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए मामले की सुनवाई 20 जुलाई तक स्थगित कर दी, लेकिन कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई से पहले सरकार इस मामले में कोर्ट में जवाब दायर करे।

इस मामले में कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा हुआ है कि क्यों न वह सरकार की एक्साइज पालिसी पर रोक लगा दे। बेंच ने इसके साथ ही इस पालिसी के तहत शराब के ठेकों की जो अलाटमेंट की जा रही है उसे जारी रखने के आदेश तो दिए हुए हैं, लेकिन यह भी साफ़ कर दिया कि शराब के ठेकों की अलाटमेंट हाई कोर्ट में दायर इन याचिका पर हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेंगी।

मामले में बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील मोहन जैन ने पक्ष रखते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि यह पालिसी एक बड़ा घोटाला है जो दस हजार करोड़ से ऊपर का है। जैन ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि पंजाब की एक्साइज पालिसी को केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति पर जारी कर दिया गया, जबकि इसके लिए मंत्रिमंडल की सहमति भी अनिवार्य है, इसलिए इस मामले में मुख्यमंत्री को प्रतिवादी के तौर पर नोटिस जारी किया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने पंजाब की एक्साइज पालिसी को पंजाब एक्साइज एक्ट-1914 और पंजाब लिकर लाइसेंस एक्ट-1956 का उल्लंघन बताते और इस पालिसी के तहत मोनोपली को प्रमोट किए जाने के आरोप लगाते हुए दाखिल याचिकाओं में हाई कोर्ट से इस पालिसी को रद किए जाने की मांग की। याचिका में नेशनल हाइवे के करीब शराब के ठेके खोलने को भी नियमों के खिलाफ बता कर इस एक्साइज पॉलिसी को रद करने की गुहार लगाई गई है।

Edited By: Kamlesh Bhatt