जेएनएन, चंडीगढ़/रूपनगर। सहकारिता विभाग ने कोविड-19 संकट में फ्रंटलाइन पर डटे अपने विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का 25 लाख रुपये का बीमा कवर करने का फैसला किया है। यह बीमा सभी रेगुलर, ठेके और आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे मुलाजिमों का किया जाएगा, जो कि इस समय पर कोरोना कर्फ्यू के दौरान लोगों को जरूरी सेवाएं मुहैया करवाने में जुटे हैं। यह घोषणा सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को यहां की।

रंधावा ने बताया कि फ्रंटलाइन पर काम कर रहे पांच सहकारी संस्थानों शूगरफैड, मिल्कफैड, मार्कफैड, पंजाब राज्य सहकारी बैंक और पंजाब राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक के 14,905 अधिकारियों व कर्मचारियों का 25 लाख रुपये प्रति मुलाजिम बीमा कवर एक साल के लिए किया जा रहा है। प्रति मुलाजिम 1977 रुपये समेत जीएसटी प्रीमियम खर्च आ रहा है। सभी मुलाजिमों के बीमा के लिए प्रीमियम का कुल खर्च 2.95 करोड़ रुपये आएगा। प्रीमियम की राशि संबंधित सहकारी संस्थान अपने-अपने मुलाजिमों की संख्या के हिसाब से अदा करेंगे। पांचों सहकारी संस्थानों में 14,905 अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं। इसमें से 8812 रेगुलर और 6093 ठेके व आउटसोर्सिंग पर सेवाएं दे रहे हैं। इस फैसले के अंतर्गत शूगरफैड के 2090, मिल्कफैड के 6298, मार्कफैड के 1421, पंजाब रा'य सहकारी बैंक के 4217 और पंजाब रा'य सहकारी कृषि विकास बैंक के 879 मुलाजिमों का बीमा होगा।

सेवानिवृत्त शिक्षक ने कोरोना महामारी में पेंशन का हिस्सा देने की इच्छा जताई

वहीं, रूपनगर जिले के गांव थलीकलां निवासी सेवानिवृत्त पंजाबी लेक्चरर ने जिला प्रशासन को कोरोना महामारी की घड़ी में अपनी पेंशन का हिस्सा देने की पेशकश की है। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल घनौली से 2010 में सेवानिवृत्त 68 वर्षीय पंजाबी लेक्चरर ईशर सिंह ने डिप्टी कमिश्नर रूपनगर सोनाली गिरि को इस बाबत पत्र लिखा है। सात मई 2020 को पंजाबी में हाथ से लिखे पत्र में बेहद भावपूर्ण शब्दावली का प्रयोग किया है।

डीसी सोनाली गिरि ने ईशर सिंह के पत्र का जवाब देते हुए उनकी सेवा भावना के लिए जिला प्रशासन की तरफ से दिल से धन्यवाद किया है। साथ ही लिखा है कि यदि जिला प्रशासन को आपकी इस बहुमूल्य सेवा की जरूरत महसूस हुई तो आपको सूचित किया जाएगा।

यह लिखा पत्र में

डिप्टी कमिश्नर रूपनगर, निवेदन है कि आदरणीय विन्नी महाजन के बतौर डीसी कार्यकाल के समय मुझे कुछ समय यहां काम करने का मौका मिला। उनकी शख्सियत से मैं काफी प्रभावित रहा हूं। जो कुछ लिख रहा हूं उसका ही प्रभाव है। मैं सेवामुक्त अध्यापक हूं। मुख्य आमदन का साधन पेंशन ही है। इस आपदा की घड़ी में मैं भी अपना नाममात्र योगदान डालने का इ'छुक हूं। मैं चाहता हूं कि 1000 रुपये महीने के हिसाब से दो साल के लिए अपनी पेंशन कोरोना फंड में हिस्सा डालूं। मेरा खाता एसबीआइ बैंक में है। आप एक बार में भी 24 हजार रुपये निकालकर इस लड़ाई में मेरा हिस्सा डाल सकते हो। मैं सिर्फ व्हाट्सएप ही चला सकता हूं। आपकी सेवा में चेक के जरिये भी राशि दे सकता हूं। आपके अगले हुकम का इंतजार है। धन्यवाद।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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