चंडीगढ़, [राजेश ढल्ल]। नगर निगम चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं में एक-दूसरे पर टिप्पणी करके आरोप लगाने की जंग छिड़ी हुई है। कांग्रेस और भाजपा नेता एक दूसरे को घोटालेबाज बता रहे हैं। एक दूसरे के कार्यकाल में हुए घोटालों की याद करवा रहे हैं। दो दिन पहले हुई सदन की बैठक में कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ ने शहर में पेड पार्किंग को घोटाला करार दिया। इस हंगामे में कैंथ ने अधिकारियों के साथ मेयर रविकांत शर्मा को भी घेरने का प्रयास किया, जिस पर मेयर रविकांत शर्मा ने भी कैंथ को ठोककर जवाब दिया। 

उन्होंने कहा कि सावन के अंधे को सब हरा हरा ही दिखता है। लगे हाथ उन्होंने रेल, बूथ और शेड घोटाले का भी जिक्र कर दिया। असल में चुनाव पास आने के साथ ही भाजपा कांग्रेस कार्यकाल में हुए कथित घोटाले को उठाकर वोट बटरोने की राजनीति शुरू कर देते हैं, जिससे कांग्रेस के कई नेता परेशान भी हो जाते हैं। हालांकि शनिवार को नगर निगम के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में भीड़ जुटाकर उनके नेता काफी उत्साहित हो रहे हैं।

 

अपना नाम भी नहीं डलवा पाए

शहर में हाल ही में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के 36 सीनेट सदस्य चुने गए हैं। जिसमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम गायब होने पर उनकी पार्टी के नेताओं के अलावा कई लोग हैरान हैं। असल में भाजपा के एक नेता तो एक साल से दावा कर रहे थे कि वह खुद ही नहीं बल्कि जो सदस्य मनोनीत होंगे उनमें उनकी ही चलेगी। लेकिन जब लिस्ट आई तो वह अपना नाम भी नहीं बचा पाए। यहां तक कि इस बार भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद का नाम भी लिस्ट में आने की उम्मीद थी, लेकिन उनके समर्थकों को भी मायूसी हाथ लगी।इस बार पूर्व सांसद सत्यपाल जैन खुद को मनोनीत करवाने के अलावा अपने करीबी पूर्व मेयर देवेश मोदगिल को भी सीनेट का सदस्य बनवाने में कामयाब रहे। इससे भी उनके विरोधी गुट के नेताओं में मायूसी है। उनका दुख इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि उनके नेता तो बाहर हो गए लेकिन जैन कामयाब रहे। इस बार पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल का नाम भी सीनेट के मनोनीत सदस्य के तौर पर कट गया। जिसको लेकर कांग्रेस सीधे तौर पर भाजपा को ही जिम्मेदार बता रहे हैं। 

छाबड़ा ने छोड़ा वीआइपी कल्चर

 

प्रदीप छाबड़ा के आप में शामिल होने के बाद शहर में नए राजनीतिक समीकरण बने हैं। ऐसे में वह भी अपने आप को आम आदमी बता रहे हैं और आम आदमी की तरह ही अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ सेक्टर-22 में एक ढाबे में जमीन पर बैठकर खाना खाया। जिसकी तस्वीर खींचकर उन्होंने अपने करीबियों को एक मैसेज के साथ भेजी। जिसमें उन्होंने लिखा कि चंडीगढ़ की पहचान तंदूर है। उन्होंने कहा कि तंदूर का खाना फाइव स्टार के खाने के सामने कुछ नहीं हैं। उनके द्वारा ढाबे के खाने की तारीफ करने के बाद अब कई लोग यहां पर खाने का टेस्ट करने के लिए आ रहे हैं। जबकि कांग्रेस में रहते हुए वह अपने नेताओं के साथ कई बार शहर के प्रतिष्ठित होटल में खाना खा चुके हैं। ऐसे में गपशप करते हुए कई नेता बोल रहे हैं यह आम आदमी पार्टी का असर है कि छाबड़ा वीआइपी कल्चर से दूर रह रहे हैं। 

पुड़ी के लिए मारोमारी 

 

नगर निगम चुनाव पास आते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में उनके समर्थकों को भी उम्मीद जग गई है कि उन्हें टिकट मिलेगी और वह पार्षद बन जाएंगे।धवन ने आप में सक्रिय होने के दौरान अपने घर पर प्रेसवार्ता की और लंच का आयोजन किया। इस लंच को उन्होंने लंगर का नाम दिया। जिसमें पुड़ी आलू की व्यवस्था थी। धवन की ओर से हलवाईयों को निर्देश था कि पूड़ी पहले बनाकर नही रखनी। जिस कारण भीड़ ज्यादा होने के कारण पूड़ी स्टॉल पर कम पड़ने लग गई।ऐसे में कई लोग नहीं माने और वह सीधा उस जगह पर पहुंच गए जहां पर पूड़ी तली जा रही थी। अब यहां हाल यह हो गया कि जैसे ही पुड़ी कढ़ाई में तेल से तलकर बाहर आई लोगों ने पुड़ी को उठाने की प्रतियोगिता छिड़ गई। यहां पर कई एक पुड़ी का इंतजार कर रहे थे तो कई उत्साहित लोग तेल से निकलने के तुरंत बाद दो दो पुड़ी उठाने लग गए जिसकी नजर भी इनकी प्लेट पर गई वह उसे गूर गूर कर देखने लग गए और कई लोग तो पुड़ी का इंतजार ही करते रह गए। 

Edited By: Ankesh Thakur