राजेश ढल्ल, चंडीगढ़

नगर निगम चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए विपक्षियों से ज्यादा उनकी अपनी ही पार्टी से बागी हुए नेता उनके लिए मुसीबत बने हुए हैं। उम्मीदवार तय करने के साथ ही पार्टियों में गुटबाजी शुरू हो गई है। लेकिन आम आदमी पार्टी में कांग्रेस और भाजपा के मुकाबले गुटबाजी कम नजर आ रही है।

साथ ही कांग्रेस और भाजपा में कई नेता ऐसे है जो कि भीतरघात करने में लगे हुए हैं। ऐसे नेताओं से राजनीतिक दलों को ज्यादा खतरा है। कई नेता तो अपनी पार्टी से बागी होकर निर्दलीय नामांकन भरकर अपनी ताल ठोक रहे हैं और अपने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ जमकर आरोप लगाते हुए प्रचार कर रहे हैं। कई नेता ऐसे है जिन्हें टिकट न मिलने पर वह नाराज होकर घर बैठ गए हैं। ये नाराज नेता कई सीटों पर उम्मीदवारों का समीकरण बिगाड़ भी सकते हैं।

भाजपा में चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े ने पार्टी के सभी नेताओं को नाराज नेताओं को मनाने की जिम्मेवारी दी है क्योंकि पार्टी को भी पता है कि नाराज नेताओं को मनाए बिना वह चुनाव नहीं जीत सकते हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन धनास सीट पर भाजपा नेता संजीव वर्मा को मनाने के लिए उनके घर पहुंचे। संजीव वर्मा यहां से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने कुलजीत संधू को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस में अभी नाराज नेताओं को मनाने की कवायद शुरू नहीं हुई है। कांग्रेस से हिमाचल के विधायक राजेंद्र राणा नाराज नेताओं को मनाने के लिए अभियान शुरू करने जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के अध्यक्षों का दावा है कि नाराज नेताओं को जल्द मना लिया जाएगा।

इन नेताओं ने बागी होकर नामांकन किया दाखिल

भाजपा की ओर से डड्डूमाजरा सीट पर राजेश कालिया को उम्मीदवार बनाने पर स्वच्छता प्रकोष्ठ के संयोजक नरेंद्र चौधरी ने निर्दलीय तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। सोशल मीडिया पर चौधरी काफी सक्रिय है। वार्ड नौ से गुरप्रीत हैप्पी ने अपनी पत्नी को निर्दलीय तौर पर नामांकन दाखिल किया है। चौधरी ने भाजपा से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया है। भाजपा अध्यक्ष अरूण सूद हैप्पी को मनाने उनके घर गए थे असफल रहे। गुरप्रीत हैप्पी को कांग्रेस के नेता शशि शंकर तिवारी ने समर्थन दिया है। शशि शंकर तिवारी ने भी कांग्रेस महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया है। वह भी इस वार्ड से अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे। कांग्रेस में प्रेम पाल चौहान ने भी बागी होकर वार्ड 15 से नामांकन भरा है। कांग्रेस ने जब हीरा लाल कुंद्रा, सियाराम और यंकी कालिया को उम्मीदवार नहीं बनाया तो वह नाराज होकर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। आप ने हीरा लाल कुंद्रा और यंकी कालिया को टिकट दिया है। धनास सीट पर जब आप ने अनिल मदान को टिकट नहीं दी तो मदान पार्टी से इस्तीफा देकर इस समय निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।

कांग्रेस इस समय यह नेता भी है नाराज

कांग्रेस में इस समय पार्षद शीला फूल सिंह, महासचिव हरमेल केसरी, पूर्व पार्षद दर्शन गर्ग, संगठन सचिव हरिजंदर सिंह, इंटक के पूर्व अध्यक्ष कुलबीर सिंह, बापूधाम से किशन लाल सहित कई नेता टिकट न मिलने से नाराज हैं। कांग्रेस ने तीन बार लगातार चुनाव जीत रही शीला फूल सिंह का टिकट काट दिया, जिस कारण शहर में रहने वाली धनाक बिरादरी के मतदाता नाराज हैं।

एक दिन में लौटी ज्योति

सेक्टर-25 से टिकट न मिलने पर महिला कांग्रेस की महासचिव ज्योति हंस सोमवार को पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थी। शामिल होते ही सेक्टर-25 में हुए कार्यक्रम में ज्योति हंस ने कांग्रेस नेताओं पर जमकर आरोप लगाते हुए मतदाताओं को उनका बहिष्कार करने के लिए कहा। लेकिन मंगलवार सुबह वह फिर से कांग्रेस में वापस लौटी आई। ज्योति हंस को कांग्रेस में वापस लाने में मौलीजागरां से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार ओम प्रकाश सैनी और ब्लाक अध्यक्ष अनिल कुमार ने अहम भूमिका निभाई।

Edited By: Jagran