चंडीगढ़, जेएनएन। मोहाली के युवा क्रिकेटर शुभमन गिल जूनियर व‌र्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद दोस्तों की नजर में जूनियर डॉन ब्रेडमैन बन गए। यह ब्रेडमैन हमेशा शांत रहता है लेकिन मैदान में आक्रामक हो जाता है। आक्रामक इतना कि कभी-कभी सारा दिन क्रीज पर डटे रहते और कोई भी दोस्त उन्हें आउट नहीं कर पाता। शुभमन को निखारने में सबसे बड़ा नाम उनके पिता लखविंदर सिंह का ही है। पिता ने बचपन से ही ठान लिया था कि वे शुभमन को क्रिकेटर बनाएंगे। किसी से वह पिछडे़ नहीं इसलिए पहले तो खेत को ही ग्राउंड बना दिया। बाद में गांव छोड़ मोहाली में किराये पर रहने लगे और बेटे को पीसीए एकेडमी में दाखिला दिलाया। कोच और दोस्तों के अनुसार बेहद शांत स्वभाव का शुभमन बैटिंग के दौरान बेहद आक्रामक हो जाता है।

अब शुभमन गिल साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैच खेलेंगे। टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले शुभमन गिल ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने हर मैच में खुद को साबित किया है। साल-2018 अंडर-19 व‌र्ल्ड कप में शुभमन गिल ने पांच मैचों में 124 की औसत से 372 रन बनाए थे।

कोचिंग के लिए खेत में ही बना दिया था ग्राउंड
पिता लखविंदर बताते हैं कि वे मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का जिले के चक खेरेवाला गांव के रहने वाले हैं। मैंने बचपन से ही ठान लिया था कि शुभमन को क्रिकेटर बनाउंगा। शुभमन की कोचिंग के लिए मैंने अपने खेत में एक स्थायी क्रिकेट ग्राउंड बनाया था। शुभमन बतौर बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा प्रेक्टिस कर सके, इसके लिए मैंने खास तौर पर रणनीति बनाई थी। मैं खुद पास खड़े होकर सबको चुनौती देता था कि जो भी शुभमन गिल को आउट करेगा, उसे वे 100 रुपये इनाम देंगे। इनाम के लिए आसपास के गांवों के कई लड़के ग्राउंड में पहुंच जाते थे। इस तरह शुभमन गिल लगातार घंटों बल्लेबाजी करता। गेंदबाज भी शुभमन गिल को आउट करने में खूब मेहनत करते। शुभमन रोजाना 5 से 6 घंटे क्रीज पर टिककर बड़े आराम से बल्लेबाजी करता था। आलम यह था कि कई बार शुभमन को पूरे दिन कोई भी गेंदबाज आउट नहीं कर पाता था।

शुभमन देखते रहते थे सीनियर प्लेयर्स के प्रेक्टिस सेशन
लखविंदर ने बताया कि बेटे को क्रिकेटर बनाने का जुनून उनके सिर पर इस कदर सवार था कि वे गांव में अपनी खेतीबाड़ी छोड़कर मोहाली में किराये के मकान में आकर बस गए। शुभमन ने काफी समय तक स्कूल की एक क्रिकेट एकेडमी में कोचिंग ली, उसके बाद दाखिला मैंने पीसीए मोहाली क्रिकेट एकेडमी में करवा दिया। इस एकेडमी में शुभमन ने काफी कुछ सीखा। शुभमन की क्रिकेट में ऐसी लगन थी कि वह रोज सुबह 3.30 बजे उठते थे और 4 बजे एकेडमी में पहुंच जाते थे। दिनभर प्रेक्टिस करने के बाद वह शाम को घर लौटते थे। क्रिकेट में उनकी समझ बढ़े, इसके लिए शाम को सीनियर प्लेयर्स के सेशन देखते थे। इसी तरह वर्षों की मेहनत के बाद आज शुभमन गिल को अपनी मंजिल मिली है।

हमेशा लाल रूमाल जेब में रखकर खेलते हैं शुभमन
शुभमन गिल की माता कीरत गिल बताती हैं कि शुभमन को शुरू से ही लाल रंग काफी पसंद है। शुभमन को ऐसा लगता है कि लाल रूमाल उसके लिए बेहद लकी है, ऐसे में जब भी वह क्रिकेट मैच खेलने के लिए मैदान में उतरता है, हमेशा लाल रूमाल अपनी जेब में रखता है। शुरुआत में एक-दो बार शुभमन ने सफेद रूमाल रखकर मैच खेला लेकिन वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। इसके बाद शुभमन का यकीन और पक्का हो गया और अब वह हमेशा अपनी जेब में लाल रूमाल डालकर मैच खेलने के लिए मैदान में उतरता है।

हमेशा शांत रहने वाला शुभमन बैटिंग के दौरान हो जाता है आक्रामक
शुभमन के दोस्त ध्रुव बताते हैं कि शुभमन शांत स्वभाव का है। वह दिन-रात क्रिकेट के बारे में ही सोचता है। जब वह प्रेक्टिस नहीं कर रहा होता है तो क्रिकेट की ही बातें करता है। जब वह मोबाइल देख रहा होता है तो यूट्यूब पर क्रिकेट मैच देख रहा होता है। अभी वह काफी व्यस्त रहता है तो महीनों तक मुलाकात नहीं होती।

कभी गलत शॉट नहीं खेलता शुभमन गिल
पीसीए कोच टिंकू ने बताया कि शुभमन गिल जब आठ साल के थे, तब वह उनके पास कोचिंग लेने के लिए आए थे। पांच साल तक शुभमन ने उनसे कोचिंग ली। शुभमन ऐसे खिलाड़ी हैं जो हर बॉल को मिडिल करता था। पिच पर उस जैसा पेशेंस वाला खिलाड़ी मौजूदा समय में कोई नहीं है। उसकी खास बात यह है कि कभी शॉट खेलने की जल्दी नहीं रहती है। वह उसी गेंद पर शॉट खेलता है जिसे वह बाउंड्री के पार पहुंचा सके। शुभमन युवा खिलाड़ी है और एक लंबा क्रिकेट करियर उसका इंतजार कर रहा है।
 

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