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FASTag वॉलेट में 210 रुपये फिर भी 100 रुपये जुर्माना, अब NHAI और बैंक को लौटाने होंगे 4100 रुपये

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:01 PM (IST)

चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने फास्टैग वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस होने पर भी जुर्माना वसूलने के लिए एनएचएआई और बैंक ...और पढ़ें

पर्याप्त बैलेंस के बावजूद टोल पर जुर्माना लगाना पड़ा भारी। (सांकेतिक फोटो)

पर्याप्त बैलेंस के बावजूद टोल पर जुर्माना लगाना पड़ा भारी। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. फास्टैग में बैलेंस होने पर भी जुर्माना वसूलना गलत।

  2. आयोग ने एनएचएआई और बैंक को दोषी ठहराया।

  3. 4100 रुपये का हर्जाना और जुर्माना भरने का आदेश।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। फास्टैग वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस होने पर भी टोल पर जुर्माना वसूलना नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और पेमेंट बैंक को महंगा पड़ गया। एनएचएआई और बैंक को दोषी मानते हुए चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने 100 रुपये का जुर्माना वापस करने के साथ 4000 रुपये हर्जाना लगाया है। कुल 4100 रुपये लौटाने का आदेश दिया।

मामला 17 जून 2022 का है। शिकायतकर्ता चंडीगढ़ से जालंधर जा रहे थे। पंजाब में बहराम टोल प्लाजा पर उनके फास्टैग को अपर्याप्त बैलेंस बताकर टोल फीस के साथ 100 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगा दिया गया। कुल 200 रुपये काट लिए गए।

शिकायतकर्ता का कहना था कि उस वक्त उनके फास्टैग वॉलेट में 210 रुपये थे। उन्होंने दस्तावेज पेश किए और एनएचएआई के सर्कुलर का हवाला दिया। सुनवाई के दौरान पेमेंट बैंक ने बताया कि फास्टैग अकाउंट में 150 रुपये का मिनिमम सिक्योरिटी बैलेंस होना जरूरी है, जो टोल भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं होता।

बैंक ने कहा कि यदि 210 रुपये में से टोल कटता तो बैलेंस 150 से नीचे चला जाता, इसलिए जुर्माना लगाया गया। एनएचएआई की ओर से कोई पेश नहीं हुआ, इसलिए आयोग ने एकतरफा कार्रवाई की।

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि एनएचएआई ने खुद फरवरी 2021 में अनिवार्य मिनिमम बैलेंस की शर्त खत्म कर दी थी। बैंक का 150 रुपये वाला आंतरिक नियम एनएचएआई की गाइडलाइन पर भारी नहीं पड़ सकता।

एनएचएआई के नियमों के अनुसार ही बैंक को काम करना होगा और उपभोक्ता को सभी शर्तें स्पष्ट तौर पर बतानी होंगी। आयोग ने माना कि पॉजिटिव बैलेंस के बावजूद जुर्माना लगाना सेवा में कमी है।

बैंक का ये तर्क भी खारिज कर दिया कि चार्जबैक की समय सीमा निकल चुकी है। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि समय सीमा खत्म होने से सेवा में कमी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। इस फैसले से साफ हो गया है कि फास्टैग में वॉलेट नेगेटिव नहीं है तो टोल पर  जुर्माना नहीं वसूला जा सकता।

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