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हरियाणा में किसानों को 50 प्रतिशत विकसित जमीन, चंडीगढ़ के 22 गांवों के किसान कब तक करेंगे इंतजार?

By Rajesh DhallEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 04 Nov 2026 12:31 PM (IST)

हरियाणा सरकार की भूमि पूलिंग नीति में किसानों को 50% विकसित जमीन मिलने से चंडीगढ़ के 22 गांवों के किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

चंडीगढ़ के किसानों को कब मिलेगा हरियाणा जैसा लाभ (फाइल फोटो)

चंडीगढ़ के किसानों को कब मिलेगा हरियाणा जैसा लाभ (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हरियाणा की नीति से चंडीगढ़ के किसानों में उम्मीद जगी

  2. किसान 50% विकसित जमीन में हिस्सेदारी की मांग कर रहे

  3. चंडीगढ़ प्रशासन की भूमि पूलिंग पर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की 2026 की भूमि पूलिंग नीति में जमीन मालिकों को 50 प्रतिशत विकसित जमीन में हिस्सेदारी देने के फैसले ने चंडीगढ़ के 22 गांवों के किसानों की उम्मीदें फिर बढ़ा दी हैं।

चंडीगढ़ पेंडू विकास मंच ने इस फैसले का स्वागत करते हुए यूटी प्रशासन से सवाल किया है कि जब हरियाणा में किसानों को विकास का भागीदार बनाया जा सकता है तो चंडीगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हो रहा? मंच ने सभी 22 गांवों के लिए तत्काल भूमि पूलिंग नीति बनाने की मांग की है।

चंडीगढ़ में यह मुद्दा नया नहीं है। शहर के विस्तार और मास्टर प्लान के तहत गांवों के आसपास की कृषि भूमि के नियोजित विकास की जरूरत लगातार सामने आती रही है।

किसानों की दलील है कि उनकी जमीन पर आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत विकास की योजनाएं बनती हैं, लेकिन जमीन मालिकों को विकास का सीधा लाभ देने के लिए कोई स्पष्ट हिस्सेदारी व्यवस्था नहीं है। वे जमीन के बदले केवल मुआवजा पाने के बजाय विकसित भूखंडों के रूप में भविष्य की हिस्सेदारी चाहते हैं।

कब-कब उठा भूमि पूलिंग का मुद्दा?

  • 2021: चंडीगढ़ प्रशासन ने भूमि पूलिंग की संभावनाएं तलाशने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट फार ह्यूमन सेटलमेंट्स (IIHS) से अध्ययन और नीति का प्रारूप तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।
  • अगस्त 2024: प्रशासन ने जमीन की उपलब्धता और मास्टर प्लान की जरूरतों का हवाला देते हुए इस नीति को व्यावहारिक नहीं माना।
  • 12 अगस्त 2025: सांसद मनीष तिवारी के लोकसभा में सवाल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में न तो भूमि पूलिंग नीति बनाई गई है और न ही उस पर विचार किया जा रहा है।
  • जनवरी 2026: प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भूमि पूलिंग मॉडल पर आगे बढ़ने की मंशा जताई। इससे किसानों को उम्मीद बंधी।
  • 26 फरवरी 2026: मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने कहा कि मास्टर प्लान-2031 के तहत भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए जमीन सुरक्षित रखना जरूरी है। प्रशासन ने भूमि पूलिंग से दूरी बनाने के संकेत दिए।
  • 9 मार्च 2026: चंडीगढ़ पेंडू विकास मंच के बैनर तले किसानों ने सारंगपुर बैरियर पर प्रदर्शन कर भूमि पूलिंग, लाल डोरा खत्म करने और कलेक्टर रेट को बाजार भाव के अनुरूप करने सहित कई मांगें उठाईं।
  • 8 अगस्त 2026: प्रशासन की ओर से करीब 1750 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की योजना सामने आई। साथ ही 22 गांवों में किसान समितियां बनाकर सुझाव और आपत्तियां लेने तथा पंजाब-हरियाणा की तर्ज पर नीति का प्रारूप तैयार करने की संभावना जताई गई।

चंडीगढ़ में अभी क्या है स्थिति?

चंडीगढ़ में भूमि पूलिंग को लेकर प्रशासन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अगस्त में सामने आई योजना के अनुसार शहर की परिधि में करीब 2585 एकड़ ऐसी कृषि भूमि चिह्नित की गई थी, जिसका अधिग्रहण नहीं हुआ है। इसमें से करीब 1750 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने पर विचार किया गया। इसकी अनुमानित लागत लगभग 14 हजार करोड़ रुपये बताई गई।

प्रस्तावित उपयोग के अनुसार 555 एकड़ जमीन संस्थागत परियोजनाओं और 1195 एकड़ आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के लिए रखी जानी है, जबकि 835 एकड़ को हरित क्षेत्र के रूप में छोड़ने की योजना है। चरणबद्ध अधिग्रहण चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से किए जाने की संभावना भी जताई गई थी।

प्रस्ताव का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रशासन की ओर से 22 गांवों में किसान समितियां गठित कर उनकी राय लेने और उसके आधार पर नीति का प्रारूप तैयार करने की बात सामने आई थी। इसके बाद प्रारूप गृह मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाना है।

हालांकि अभी भूमि पूलिंग नीति लागू होने, किसानों की हिस्सेदारी तय होने या अधिग्रहण शुरू होने की अंतिम अधिसूचना सामने नहीं आई है। यानी किसानों की मांग और प्रशासन की योजना के बीच अभी फैसला बाकी है।

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