जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : सेक्टर-37 ए स्थित विवादित कोठी प्रकरण में तत्कालीन संदिग्ध अफसरों की भूमिका, हस्ताक्षर और उनकी जवाबदेही पर स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने एस्टेट ऑफिस से जवाब मांगा था। एस्टेट ऑफिस अधिकारियों ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद एसआइटी को रिपोर्ट सौंपने के लिए समय मांगा था। अब इस मामले में एस्टेट आफिस की लापरवाही को संज्ञान में लेकर एसआइटी की तरफ से रिमांइडर नोटिस भेजा गया है। अब एस्टेट ऑफिस की तरफ से एक निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

सेक्टर-37 से जुड़े कोठी प्रकरण में एसआइटी ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्री के जिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों के नाम स्टेट ऑफिस से पूछे हैं। इसके लिए एसआइटी की तरफ से एस्टेट ऑफिसर को पत्र भेजा गया था। इसमें पूछा गया है कि मामले में फर्जी तरीके से हुई रजिस्ट्री के लिए जिम्मेदार कौन है और मामले में उसकी भूमिका क्या है। अब मामले की जांच करने के बाद एस्टेट ऑफिस की तरफ से एसआइटी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

मामले में रजिस्ट्री के समय जिन दो एचसीएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही है, उनमें से एक मनोज खत्री से एसआइटी पूछताछ कर चुकी है, जबकि अभी तत्कालीन तहसीलदार से पूछताछ होनी है। चंडीगढ़ में तहसीलदार के पद पर तैनात रहे अधिकारी यहां से वापस हरियाणा लौटने पर अब प्रमोट होकर एचसीएस बन चुके हैं। आरोप है कि 2019 में इसी अधिकारी की यहां तैनाती के दौरान नकली कोठी मालिक को पेशकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करवाई गई। आरोप यह भी है कि एस्टेट ऑफिस में तैनात तत्कालीन एचसीएस अधिकारी ने दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर फर्जी रजिस्ट्री में मदद पहुंचाई। कोठी प्रकरण में एस्टेट ऑफिस से लिखित तौर पर रिपोर्ट मांगी गई थी। अभी तक जवाब नहीं मिलने पर दोबारा से रिमांइडर भेजा गया है। एसआइटी अपने स्तर पर भी जांच कर रही है।

केतन बंसल, एसपी सिटी

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