विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पर्यावरणविद डा. वंदना शिवा का सुझाव, जैविक खेती अपनाकर उपभोक्ताओं के साथ मिल नया गठबंधन बनाएं किसान

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Sat, 20 Nov 2021 07:30 PM (IST)

प्रसिद्ध पर्यावरणविद डा.वंदना शिवा ने कृषि कानूनों की वापसी के बाद किसानों को सुझाव दिया है कि वह जैविक खेती ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में सेमिनार को संबोधित करतीं डा. वंदना शिवा। जागरण
चंडीगढ़ में सेमिनार को संबोधित करतीं डा. वंदना शिवा। जागरण

इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। प्रसिद्ध पर्यावरणविद डा. वंदना शिवा ने तीन कृषि कानून वापस करवाने के लिए करीब एक साल तक चले आंदोलन के बाद किसानों और उपभोक्ताओं को मिलकर एक नया गठबंधन बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए जैविक खेती को अपनाया जाना और मल्टीनेशनल कंपनियों की जहरीली रासायनिक खादों व दवाओं आदि से दूरी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही उपभोक्ताओं को खाद्य वस्तुएं सस्ती मिलेंगी।

डा. वंदना शिवा शनिवार को यहां दस विभिन्न महिला संगठनों की ओर से बनाए गए संयुक्त नारी मंच की तरफ से तीन कृषि कानूनों में महिलाओं की भूमिका को लेकर आयोजित सेमीनार को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने हरित क्रांति से लेकर अब तक कृषि में बदलावों पर कहा कि मल्टीनेशनल कंपनियों ने हमारी जैव विविधता को खत्म करके अपनी जहरीली खादें बेची हैैं। राजनेताओं पर दबाव बनाकर ऐसे कानून बनवाए गए कि बीजों, जमीनों आदि सब पर उनका कब्जा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीड बिल अब भी संसद में लंबित है यदि वह बिल आ गया तो किसान अपने पास अपना बीज भी नहीं रख पाएगा।

डा. शिवा ने यह भी कहा कि जो कंपनियां रासायनिक खाद बेचकर लोगों को बीमार कर रही हैं वही इनके इलाज की दवाएं बनाने वाली कंपनियों को फंडिंग भी कर रही हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से आह्वान किया कि वह जरूरी वस्तुएं कानून पर अपना विरोध जरूर जताएं। कृषि हमारे खाने से जुड़ी हुई चीज है इसका व्यापार नहीं किया जा सकता। किसानों को भी इस विषय पर काम शुरू करना चाहिए कि खेती कैसी हो। उन्हें यूरिया और रासायनिक खादों के प्रयोग से बचकर अपनी जमीन को बचाना होगा।

इसी दौरान मेधा पाटेकर ने कहा कि अहिंसा और सत्याग्रह ही इंसाफ का रास्ता है, यह किसान आंदोलन ने बताया दिया है। अब सभी वर्ग, वर्ण और जातियों को एकजुट होकर कारपोरेट के प्रभाव तले बन रही नीतियों के खिलाफ लडऩा चाहिए। इसी अवसर पर अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 33 प्रतिशत पंचायती जमीन के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रही परमजीत कौर लोंगोवाल ने कहा कि महिलाओं खासकर मजदूर वर्ग की महिलाओं के लिए आंदोलन लडऩे आसान नहीं हैं। वहीं किसान आंदोलन में शामिल रहीं जसबीर कौर नत्त ने अपने अनुभव साझा किए। जबकि डा. नवशरण कौर ने कहा कि महिलाओं ने आंदोलन में पुरुषों का साथ दिया है, अगर वह ऐसा न करतीं तो आंदोलन आज इस मुकाम पर न पहुंचता।