चंडीगढ़, [डॉ. सुमित सिंह श्योराण]। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच इससे निपटने की कोशिश जारी है। चंडीगढ़ में इस दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। कोरोना वायरस के प्रकोप को कम करने के लिए चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआइआर-सीएसआइओ) ने खास इलेक्ट्रोस्टेटिक डिसइन्फेक्शन मशीन तैयार की है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर भी छोटी से छोटी जगह को संक्रामक सूक्ष्मजीवियों से मुक्त किया जा सकेगा, खासकर कोरोना वायरस को। इस मशीन को बनाने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि चार्ज पार्टिकल थ्योरी पर आधारित मशीन कोरोना वायरस को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

इलेक्ट्रोस्टेटिक डिसइन्फेक्शन मशीन तैयार की, दिल्‍ली में एक-दो दिन में होगा फाइनल ट्रायल

हाल ही में मशीन का ट्रायल चंडीगढ़ स्थित सीएसआइओ कैंपस किया गया। यह ट्रायल सफल रहा। जानकारी के अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) अब इसी सप्‍ताह इसे नई दिल्ली में वैज्ञानिकों की टीम के सामने ट्रायल के लिए भेजेगा। सीएसआइओ को उम्मीद है कि यह मशीन मौजूदा स्थिति के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित होगी।

सीएसआइओ में प्रदर्शित इलेक्ट्रोस्टेटिक डिसइन्फेक्शन मशीन।

छिड़काव करने वाली अब तक मौजूद अन्य मशीनों के मुकाबले 80 फीसद अधिक प्रभावी, हर जगह असरदार

छिड़काव करने वाली साधारण मशीनों के मुकाबले यह 80 फीसद अधिक प्रभावी है। सीनियर साइंटिस्ट डॉ. मनोज कुमार पटेल द्वारा तैयार इलेक्ट्रोस्टेटिक डिसइन्फेक्शन नामक इस मशीन की टेक्नोलॉजी को हाल ही में कर्नाटक की एक व्यावसायिक कंपनी को ट्रांसफर किया गया है, जो उत्पादन शुरू कर रही है।

कोरोना वायरस से बचाव में कारगर तकनीक के बारे में रिसर्च इंस्टीट्यूट से मांगे सुझाव

डॉ. मनोज कुमार पटेल के अनुसार यह मशीन सार्वजनिक स्थानों बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, यहां तक कि घरों में भी प्रयोग की जा सकेगी। मशीन को जरूरत के हिसाब से छोटा या बड़ा बनाया जा सकता है। मशीन की कीमत 40 से 50 हजार रुपये होगी, लेकिन सरकार द्वारा अगर टेक्नोलॉजी को मंजूरी मिली तो यह मशीन 10 से 15 हजार तक में भी उपलब्ध हो जाएगी। सरकार से व्यापक उत्पादन की मंजूरी मिलते ही अगले कुछ दिनों में मशीन सस्ते दामों पर बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

सीएसआइओ के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. मनोज कुमार पटेल।

डॉ. पटेल की अगुआई में सहायक वैज्ञानिक अनिल जांगड़ा और अक्की रेड्डी शिवराम की टीम ने इसे तैयार किया है। करीब दो साल से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। डॉ. पटेल ने कहा कि हमने सफल तकनीकी उपलब्ध करा दी है, जिसे कोरोना वायरस की समस्या को देखते हुए भारत सरकार आवश्यकतानुरूप अपने स्तर पर तैयार करवा सकती है।

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'' इनडोर-आउटडोर को तेजी से सैनिटाइज करने में आ रही दिक्कतों को इस मशीन से दूर किया जा सकेगा। इसके प्रयोग से पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही इसका असर कीटाणुओं पर सामान्य स्प्रे से अस्सी फीसद तक अधिक होगा। चार्ज पार्टिकल विधि आधारित स्प्रे कोरोना वायरस के विरुद्ध असरदार होगा।

                                                               - डॉ. मनोज कुमार पटेल, सीनियर साइंटिस्ट, सीएसआइओ।

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डॉ. सुरेंद्र सिंह सैनी।

'' सीएसआइओ साइंटिस्टों ने इन्फेक्शन पहुंचाने वाले वायरस को खत्म करने के लिए प्रभावी उपकरण तैयार किया है। इलेक्ट्रोस्टेटिक डिसइन्फेक्शन मशीन कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने में काफी फायदेमंद साबित होगी। सरकार आवश्यकतानुरूप इसका उत्पादन करा सकती है।

                                  - डॉ. सुरेंद्र सिंह सैनी, हेड बिजनेस  इनोवेटिव एंड प्रोजेक्ट प्लानिंग, सीएसआइओ।

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देशभर से मांगे गए तकनीकी सुझाव

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अभी सरकार के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। खासतौर पर तकनीकी उपकरण की कमी है जो रोकथाम के कामों को तेजी से और कारगर तरीके से निपटा सकें। केंद्र सरकार के डीएसटी विभाग ने इस दिशा में काम कर रहे देश के सभी रिसर्च इंस्टीट्यूट्स से मदद मांगी है। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में कारगर टेक्नोलॉजी के लिए सुझाव मांगे गए हैं। ताकि जल्द से जल्द इस पर काम शुरू हो सके। बेहतर डिवाइस के निर्माण में 50 फीसद से अधिक तक आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।

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