चंडीगढ़, जेएनएन। माइग्रेशन और कला। यूं तो दोनों अलग हैं, लेकिन इन दिनों मजदूर और कलाकारों की स्थिति एक जैसी ही है। ऐसे में कलाकार भी क्या मजदूरों की तरह माइग्रेट हो रहे हैं। ऐसे ही गंभीर विषय पर पंजाब ललित कला अकादमी द्वारा वेबिनार का आयोजन हुआ। इसमें अकादमी के अध्यक्ष दीवान माना, वरिष्ठ कलाकार कृष्णा खन्ना, शेबा और सुधब्रता सेनगुप्ता ने हिस्सा लिया।

कृष्णा खन्ना ने जहां कला की महत्ता पर बात की, साथ ही कहा कि कला आपको हजारों वर्षों तक लेकर जाती है। पीछे भी और आगे भी। ऐसे में ये समय भी कला की नजरों में कैद रहेगा। जो हर किसी को इस समय से जोड़ेगा। ये दुखद है कि जिस तरह से माइग्रेशन हुआ, मजदूर कमजोर दिखा, ये पेंटिंग में मजबूती से दिखाया जा सकता है। विजुअल्स, हमेशा ही हमारे इतिहास को दिखाने का बेहतर जरिया है। 

शेबा ने कहा कि अभी मजदूरों और कलाकारों के लिए मुश्किल समय है। दोनों ही अपनी जीविका के लिए सोच रहे हैं, ऐसे में पेंटिंग और अन्य विषयों पर युवाओं के लिए मुश्किल समय है। सुधब्रता ने पुरानी पेंटिंग दिखाते हुए कहा कि कुछ वर्षों पहले मुङो ये पेंटिंग मैग्जीन में मिली, जिसमें शाहजहां अपने अंतिम दिनों में अकेला है।

पीजीआइ के डॉ. गुरु को किया सम्मानित

राष्ट्रीय भ्रष्टाचार नियंत्रण एवं जनकल्याण संगठन राष्ट्रीय चेयरमैन दीपक शर्मा व राष्ट्रीय सचिव रंजीत वर्मा ने वीरवार को पीजीआइ के डॉ. गुरु को पगड़ी पहनाकर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर पीजीआइ के डॉ. प्रिनाय, विपन शर्मा, अतीत, अंजू बाला, नरेंद्र त्यागी, भावना रानी, मोनिका शर्मा, सहित राजपूत व मनोज कुमार को कोविड-19 अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से हेल्थ मिनिस्टर के ओएसडी डॉ. वरिंदर गर्ग व राष्ट्रीय भ्रष्टाचार नियंत्रण एवं जनकल्याण संगठन चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष अर¨वद दुबे उपस्थित रहे।

Posted By: Vikas_Kumar

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