चंडीगढ़ में फिर लौट के आया पीतल के बर्तनों का समय, परंपरा के साथ स्वास्थ्य से जुड़ा खरीदारी का ट्रेंड
धनतेरस पर चंडीगढ़ के बाजारों में पीतल और कांसे के बर्तनों की मांग बढ़ी, जिसने खरीदारी के ट्रेंड को परंपरा ...और पढ़ें

पीतल और कांसे के बर्तनों की बढ़ी मांग। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
धनतेरस पर पीतल- कांसे के बर्तनों की बढ़ी मांग।
200 रुपये से 30,000 तक के डिनर सेट बिके।
अलग-अलग आकार के बर्तनों में दिलचस्पी।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। कहते है जमाना लौट के आता है। इसका प्रमाण बर्तन बाजार है। करीब तीन दशक के बाद अब पारंपरिक धातुओं से बने बर्तनों की चमक फिर से बिखरी।
धनतेरस पर लोगों ने स्टील के बर्तनों के साथ-साथ पीतल (ब्रास) और कांसे के बर्तन भी खूब खरीदे। ऐसे में खरीदारी का ट्रेंड परंपरा के साथ स्वास्थ्य से जुड़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक किचनवेयर और क्राकरी की ओर बढ़े रुझान के बीच एक बार फिर लोग पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। धातु पुरानी है लेकिन इनसे बर्तन अलग-अलग डिजाइन के तैयार किए गए हैं।
बाजारों में पीतल के बर्तनों की कई तरह की वैरायटी उपलब्ध रही। 200 रुपये की कटोरी और गिलास से लेकर 30 हजार रुपये तक के डिनर सेट ग्राहकों ने खरीदे। जरूरत और बजट को देखते हुए खरीदारी की। वहीं, इससे भी महंगे विकल्प के तौर पर कांसे के बर्तन मौजूद रहे।
ग्राहकों ने पारंपरिक डिजाइन और अलग-अलग आकार के बर्तनों में दिलचस्पी दिखाई। बर्तन बाजारों में सिर्फ पीतल और कांसे ही नहीं, बल्कि स्टील के बर्तनों की भी अच्छी मांग रही। इसके अलावा क्राकरी, डिनर सेट, कांच के बर्तन और किचन से जुड़े दूसरे सामान की खरीदारी भी हुई।