सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़

केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में 21 प्रकार की दिव्यांगता वेरीफाई करके घोषित करने के बाद सरकारी कार्यस्थल को डिसेबिल्टी फ्रैंडली बनाने के निर्देश दिए थे। केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद वर्ष 2017 में चंडीगढ़ प्रशासन ने कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों को डिसेबिल्टी फ्रैंडली बनाने की घोषणा की। शहर में हेरिटेज इमारतें होने के कारण उन्हें डिसेबल फ्रैंडली की प्लानिग हुई लेकिन हैरत की बात है कि 80 फीसद से ज्यादा सरकारी इमारतें और कार्यस्थल आज भी दिव्यांगों की पहुंच से दूर है। इन वर्कप्लेस में खुद दिव्यांगता को आश्रय देने वाली सोशल वेलफेयर सेक्टर-17 की इमारत भी शामिल है।

शहर को न्याय दिलाने वाले खुद इंतजार में

नेशनल लीगल सर्विस ऑथोरिटी की तरफ से शहर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश में स्टेट लीगल सर्विस आथोरिटी सालसा का गठन किया है। सालसा का कार्यालय सेक्टर-9 में स्थित है। सालसा का मुख्य कार्य शहर के हर व्यक्ति को उचित और समय पर इंसाफ मुहैया कराना है लेकिन हैरत की बात है कि खुद सालसा का कार्यालय डिसेबल फ्रैंडली नहीं है।

100 से ज्यादा स्कूल इमारतें नहीं है डिसेबल फ्रैंडली

शहर में कुल 115 सरकारी स्कूल है। प्रशासन की प्लानिग के बावजूद शहर की 100 से ज्यादा स्कूल इमारतें ऐसी है जिनमें न तो रैंप है और न ही सुलभ शौचालय। इन स्कूल इमारतों में शरीरिक रूप से दिव्यांग स्टूडेंट्स को पढ़ाई करना असंभव है।

वर्कप्लेस के साथ पार्किंग भी नहीं है डिसेबल फ्रैंडली

शहर के विभिन्न सरकारी कार्यालयों के अलावा शहर की पार्किंग की भी बात करें तो 50 फीसद से ज्यादा पार्किंग में डिऐबल फ्रैंडली का होना सुनिश्चित होना है। जिसके चलते वाहन का इस्तेमाल करने वाले दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोट-

डिसेबल फ्रैंडली बनाने के लिए प्लानिग बनाई गई है और जो भी नई इमारतें बनाई जा रही है उसमें सभी सुविधाएं दी जा रही है। इसके साथ पुरानी इमारतों को भी डिसेबल फ्रैंडली बनाने की प्लानिग शुरू हुई है।

सीबी ओझा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, प्रशासन।

Edited By: Jagran