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डेरा सच्चा सौदा के 9 अनुयायी चंडीगढ़ कोर्ट ने किए बरी, 15 साल पहले मोगा में हुए बस आगजनी मामले में फैसला

By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
Published: Thu, 15 Oct 2026 08:04 PM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ जिला अदालत ने 11 साल पुराने मोगा बस आगजनी मामले में डेरा सच्चा सौदा के नौ अनुयायियों को सबूतों ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के नौ अनुयायियों को सबूतों के अभाव में बरी किया। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ जिला अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के नौ अनुयायियों को सबूतों के अभाव में बरी किया। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रांसफर हुआ था मुकदमा।

  2.  गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से भी जुड़ा था मामला।

  3. सबूतों के अभाव में सभी आरोपितों को दोषमुक्त किया।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। मोगा में 15 साल पहले एक बस को आग लगाने के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के नौ अनुयायियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

बरी होने वालों में सुखजिंदर सिंह उर्फ सन्नी, शक्ति सिंह, बलजीत सिंह, रंजीत सिंह भोला, निशान सिंह, रनदीप सिंह उर्फ नीला, नरिंदर कुमार शर्मा, संदीप सिंह और पृथ्वी सिंह शामिल हैं।

इनके अलावा इस मामले में दो आरोपितों मोहिंदर पाल उर्फ बिट्टू और प्रदीप कुमार की मौत हो चुकी है। बिट्टू की जेल में और प्रदीप की दिनदिहाड़े गाेलियां मारकर हत्या कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर कर दी गई थी।

वर्ष 2011 में मोगा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पेप्सु की बस को आग लगाने और फायरिंग करने के आरोप में केस दर्ज किया था। आरोप था कि डेरा सच्चा सौदा के 200-300 अनुयायी मोगा में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

पहले तो पुलिस ने इस केस की एफआईआर में किसी का नाम नहीं शामिल किया। यहां तक कि पुलिस ने अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट भी पेश कर दी थी, लेकिन जून 2018 में पुलिस ने 11 लोगों को इस केस में आरोपित बना दिया था।

आरोपितों का केस लड़ने वाले एडवोकेट अमर डी.कामरा ने अदालत में बहस के दौरान कहा कि पुलिस ने केवल इन लोगों को फंसाने के मोगा बस आगजनी मामले में आरोपित बना दिया। एडवोकेट कामरा ने कहा कि 2015 में पंजाब में बेअदबी के मामले हुए।

पुलिस ने इस केस का इस्तेमाल कर उन मामलों को सुलझाने की कोशिश की। पुलिस ने 2018 में बेअदबी मामले में मोहिंदर पाल उर्फ बिट्टू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे टाॅर्चर कर उसका कबूलनामा लिया और इन्हें आरोपित बना लिया। जबकि इनका इस केस से कोई संबंध नहीं था।

धार्मिक समागम के विरोध से बढ़ा था विवाद

वर्ष 2011 में मोगा क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों द्वारा धार्मिक समागम आयोजित करने का प्रयास किया गया था। स्थानीय सिख संगठनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। विरोध के चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया।

इस दौरान डेरा समर्थकों के टेंट और कुछ मोटरसाइकिलों को आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभालने का प्रयास किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग तथा लाठीचार्ज किया।

2015 के बेअदबी मामलों की जांच के चर्चा में आया मामला

वर्ष 2015 में बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं की जांच के दौरान 2011 का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आया। पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इन मामलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की।

जून 2018 में 9 डेरा अनुयायी गिरफ्तार

 जून 2018 में पंजाब पुलिस की एसआईटी ने वर्ष 2011 के आगजनी और हिंसक झड़प से जुड़े मामले में डेरे के नौ अनुयायियों को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद पुराने मामले ने एक बार फिर पंजाब में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।