चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। Delhi Assembly Elections 2020: शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने बेशक नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर मतभेद का हवाला देते हुए दिल्ली में भाजपा से गठबंधन तोड़ा है, लेकिन इसके पीछे वजह कुछ और बताई जा रही है। माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के डर से उसने अपने पांव पीछे खींचे हैैं। उसके दोहरे चरित्र पर सवाल भी उठने लगे हैैंं, क्योंकि अगर उसने CAA के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ा है तो उसे पंजाब में भी भाजपा से अलग हो जाना चाहिए। इसके अलावा केंद्र में मंत्री पद भी छोड़ देना चाहिए।

दरअसल, दिल्ली में अकाली दल बादल विरोधी परमजीत सिंह सरना व मनजीत सिंह जीके एकजुट हो गए हैैं। दोनों दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष रहे हैैं और उनकी शहरी सिखों में अच्छी पकड़ है। इसके अलावा अकाली दल से निलंबित राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींडसा और उनके विधायक बेटे परमिंदर ढींडसा पहले ही सुखबीर बादल के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किए हुए हैं।

बीते शनिवार को ही बादल विरोधी टकसाली नेताओं ने दिल्ली में सुखबीर के खिलाफ एकजुटता दिखाई थी। सरना और जीके गुट के एकजुट होने से दिल्ली में भी शिअद की राजनीतिक जमीन खिसक रही थी। दिल्ली में शहरी सिखों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में अकाली दल को यह डर सता रहा था कि कहीं दिल्ली चुनाव में उसे मात न खानी पड़ जाए। उल्लेखनीय है कि 2015 में पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद से ही पार्टी का राजनीतिक ग्र्राफ गिरता जा रहा है।

भाजपा में उठ रही ज्यादा सीटों की मांग

अहम यह है कि दिल्ली में भाजपा और अकाली दल का गठबंधन तब टूटा है जब पंजाब भाजपा में लगातार यह मांग उठ रही है कि पार्टी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े। वह कब तक अकाली दल की पिछलग्गू बनी रहेगी। अभी भाजपा विधानसभा की 117 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ती है।

दिल्ली यूनिट ने लिया फैसला : चीमा

अकाली दल के प्रवक्ता व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. दलजीत सिंह ने भाजपा से गठबंधन तोडऩे को दिल्ली यूनिट का फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी CAA पर अपने स्टैंड पर कायम है। इस कानून में मुस्लिमों को भी शामिल करना चाहिए। यह मांग अकाली दल करता रहेगा।

पंजाब में भी गठबंधन तोड़े शिअद : जाखड़

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने शिरोमणि अकाली दल पर सीधा हमला बोलते हुए दिल्ली में गठबंधन तोडऩे को उसका दोहरा चरित्र बताया है। उन्होंने कहा कि CAA को लेकर दिल्ली और पंजाब में अकाली दल का अलग-अलग स्टैंड कैसे हो सकता है। पंजाब में भी अकाली दल को गठबंधन तोडऩा चाहिए और हरसिमरत कौर बादल को केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे देना चाहिए। 

बादलों व मजीठिया परिवार ने अकाली दल को बनाया 'खाली दल': कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तरफ से शिअद को एक भी सीट न देने पर चुटकी ली है। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि बादलों और मजीठिया परिवार ने अकाली दल को 'खाली दल' बना दिया। अपनी किरकिरी के डर से अकाली दल चुनाव के मैदान से भाग खड़ा हुआ है।

रंधावा के अलावा सांसद मो. सदीक, विधायक दर्शन सिंह बराड़, परगट सिंह, नत्थू राम, कुलबीर सिंह जीरा, प्रीतम सिंह कोटभाई, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, फतेहजंग सिंह बाजवा, बलविंदर सिंह लाडी व अवतार सिंह हैनरी जूनियर ने कहा कि पंजाब में करारी हार के बाद अकाली दल को भाजपा ने पहले हरियाणा और अब दिल्ली में कोई सीट न देकर उसकी औकात दिखा दी है। अब अकाली दल बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर की केंद्रीय मंत्री के पद को बचाने के लिए दिल्ली चुनाव न लडऩे को राजी हो गया है। उन्होंने अकाली दल और इसके वर्करों को भाजपा के पास गिरवी रख दिया है।

कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि सारी उम्र अकाली दल और भाजपा के 'नाखून-मांस' वाले रिश्ते का राग आलापने वाले बड़े बादल अब मौजूदा स्थिति पर अपनी चुप्पी तोड़ें। मजीठिया परिवार के अकाली दल पर कब्जे के लिए पहले ही बड़े बादल ढींडसा, ब्रह्मपुरा, अजनाला, सेखवां, जीके जैसे नेताओं का साथ खो चुके हैं और अब भाजपा ने भी अकाली दल को उसकी औकात दिखा दी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सीट न मिलने के बाद अब अकाली दल सीएए की आड़ में चुनाव न लडऩे का नाटक कर शहीद नहीं बन सकता। संसद में सीएए के हक में वोट डालने और फिर पंजाब विधानसभा में सीएए के खिलाफ कांग्रेस सरकार की तरफ से लाए प्रस्ताव के खिलाफ जाने पर अकाली दल की दुनियाभर के सिखों ने आलोचना की है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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