चंडीगढ़ [विशाल पाठक]। क्राइम ब्रांच ने इंड स्विफ्ट कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। आरोपित कंपनी मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत और एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट द्वारा लगाए गए करीब 67 करोड़ रुपये टैक्स एवं पेनल्टी के खिलाफ याचिका दायर की थी। कंपनी का कहना है कि एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने उन पर 67 करोड़ रुपये जो टैक्स एवं पेनल्टी लगाई है। वह पूरी तरह से गलत है। डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने गलत असेसमेंट कर उन पर करोड़ों रुपये की पेनल्टी लगा दी है।

कंपनी का कहना है कि उनका बकाया टैक्स इतना नहीं बनता है। रिप्लाई के तौर पर एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट (ईटीडी) और क्राइम ब्रांच ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिप्लाई फाइल किया है। वह किसी कहानी से कम नहीं है। क्राइम ब्रांच और ईटीडी ने इंड स्विफ्ट कंपनी के खिलाफ कार्रवाई को अपने रिप्लाई में दिखाया है। किस प्रकार डिपार्टमेंट ने वैट घोटाला पकड़ा और कंपनी पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया। इसके अलावा क्राइम ब्रांच ने अपने रिप्लाई में कंपनी के मालिक, कर्मचारियों और एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट से जब्त किए गए दस्तावेजों को आधार बनाया है। दायर किए गए जवाब से ऐसा लगता है कि इंड स्विफ्ट कंपनी और एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट कंपनी पर पूरी तरह मेहरबान है। केस को मजबूती से फाइल करने की जगह अब तक की कार्रवाई को दिखाया गया है।

इंड स्विफ्ट ने अब तक जमा कराए सिर्फ 31 करोड़
असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि कंपनी ने पहले 16 करोड़ और उसके बाद 15 करोड़ रुपये डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जमा कराए थे। 16 करोड़ रुपये एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए हैं। अब तक कुल 31 करोड़ रुपये कंपनी ने जमा कराए हैं। करीब 36 करोड़ रुपये अभी तक बकाया है। जिसके खिलाफ कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है।

एडवाइजर ने दिए थे जांच के आदेश
17 जुलाई को वैट ट्रिब्यूनल की कोर्ट यूटी प्रशासन में लगी थी। इस ट्रिब्यूनल कोर्ट की अध्यक्षता पूर्व एडवाइजर परिमल राय कर रहे थे। उनकी कोर्ट में इंडो स्विफ्ट कंपनी का केस भी लगा हुआ था। उस केस में एक्साइज डिपार्टमेंट ने कंपनी पर 5 करोड़ 90 लाख 54 हजार 342 रुपये बकाया वैट निकाला। एडवाइजर ने जब केस का स्टेटस पूछा तो कंपनी के वकील ने कहा कि उनका मामला तो 31 मार्च 2015 को खत्म भी हो चुका है। एक्साइज डिपार्टमेंट ने उनसे पांच हजार रुपये का टैक्स लेकर चालान कर दिया था। इस पर एडवाइजर को शक हुआ कि कैसे 5.90 करोड़ रुपये का टैक्स मात्र पांच हजार रुपये के चालान में पूरा हो गया। इसके बाद इनक्वायरी की तो यह घोटाला सामने आया जिसके बाद विजिलेंस ने केस दर्ज किया था। इस केस की जांच अब यूटी एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट और यूटी पुलिस क्राइम ब्रांच मिलकर कर रहे हैं।
 

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

 

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!