विकास शर्मा, चंडीगढ़

मोहाली को श्रीलंका बताकर फर्जी क्रिकेट टूर्नामेंट करवाने का मामला सामने आने के बाद अब बीसीसीआइ ऐसे टूर्नामेंट्स पर नजर रखने के प्रति सतर्क हो गई है। बीसीसीआइ की एंटी करप्शन यूनिट के हेड आलोक सिंह ने बताया कि सट्टेबाज अब तक बीसीसीआइ इवेंट्स में खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़कर खेल को प्रभावित करते थे, लेकिन मोहाली प्रकरण ने सट्टेबाज के नए खेल का पर्दाफाश किया है। ऐसे में अब हम इस दिशा में भी सख्ती से निपटेंगे, उन्होंने कहा कि हमने स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन को निर्देश जारी किया है कि वह हर क्रिकेट इवेंट पर नजर रखें। खास तौर से उन फर्जी इवेंट कंपनियों पर नजर रखें जो क्रिकेट लीग करवाकर खिलाड़ियों को गुमराह करती हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों को भी ऐसे इवेंट्स से दूरी बनाए रखने का निर्देश जारी कर दिया है। मोहाली को श्रीलंका बताकर फर्जी टूर्नामेंट करवाने का मामला चाहे पंजाब में हुआ हो, लेकिन यह टूर्नामेंट गांव के एक खेल मैदान में हुआ था और इससे पीसीए का कोई लेना देना नहीं है। क्रिकेट इंडिया का सबसे पसंदीदा खेल है। हम किसी को खेलने से रोक नहीं सकते। हम अपने रजिस्ट्रर्ड खिलाड़ियों के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हैं। हमारा कोई भी खिलाड़ी ऐसी किसी फर्जी लीग में नहीं खेलता है। न ही पीसीए ऐसे इवेंट्स के लिए अपने स्पो‌र्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। भविष्य में हम इसके प्रति और सतर्क रहेंगे।

- सुशील कपूर, प्रवक्ता, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन यूटीसीए क्रिकेट एसोसिएशन पहले से इस बाबत काफी गंभीर है। चंडीगढ़ में फिलहाल ऐसी कोई एसोसिएशन या संस्था नहीं है जो खेल के माध्यम से सट्टेबाजी में सक्रिय हो। अभी यूटी क्रिकेट एसोसिएशन को बने हुए एक साल का समय हुआ है। ऐसे में हमने खिलाड़ियों को भ्रष्टाचार और एंटी डोपिग के प्रति जागरूक करने के लिए एक स्पेशल बीसीसीआइ का सेशन लगवाया था, खिलाड़ियों को भी चाहिए कि वह पैसे को न देखकर भविष्य को देखें और बीसीसीआइ मान्यता प्राप्त एसोसिएशन के साथ ही खेलें। लंबी पारी खेलने के लिए मेहनत करें।

- संजय टंडन, प्रेसिडेंट, यूटी क्रिकेट एसोसिएशन हर क्रिकेट इवेंट सट्टेबाजी से नहीं जुड़ा होता है। हम वर्षो से कारपोरेट क्रिकेट लीग करवा कर खेल को प्रमोट कर रहे हैं। इसमें मल्टीनेशनल कंपनियां, अस्पताल और बैंकों की टीमें शामिल होती हैं। यह इवेंट भव्य आयोजन के साथ स्टेडियम में आयोजित करवाए जाते हैं। इनको आयोजित करवाने के पीछे हमारा मकसद कर्मियों की फिटनेस के प्रति जागरूक करना और उन्हें मानसिक तनाव को कम करना है। इसके तमाम खर्चे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली कंपनियां उठाती हैं।

- सौरभ भनोट, मालिक, द साइ इवेंट नेविगेटर।

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