राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: लुधियाना नगर निगम में भी कांग्रेस का ही डंका बजा। कांग्रेस ने भले ही 95 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन यह जीत पार्टी की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। क्योंकि कांग्रेस को उम्मीद थी कि लुधियाना में उनकी पार्टी को कम से कम 72 सीटें जरूर मिलेंगी। हालांकि, पार्टी दस वर्षो के बाद लुधियाना नगर निगम पर अपना कब्जा जमाने से संतुष्ट है।

वहीं, कांग्रेस की चिंता इसलिए भी हुई, क्योंकि लुधियाना में अकाली दल-भाजपा के अलावा लोक इंसाफ पार्टी ने भी विपक्ष में होने के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया। कांग्रेस की मुख्य चिंता बैंस बंधुओं को लेकर ही थी। वहीं, लिप के प्रभाव को रोकने के लिए कांग्रेस के तमाम प्रयासों के बावजूद बैंस बंधुओं की पार्टी 7 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई, जबकि कांग्रेस के लिए संतुष्ट होने वाली बात यह भी रही कि इस नगर निगम चुनाव में भी आम आदमी पार्टी का ग्राफ सबसे निचले पायदान पर रहा।

इससे पहले अमृतसर, पटियाला और जालंधर में जिस प्रकार से कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला। उसके मुकाबले लुधियाना में पार्टी को कड़ी चुनौती मिली। हालांकि, पार्टी पहले से ही यह मान रही थी कि लुधियाना में विपक्ष उन्हें कड़ी टक्कर देगा, लेकिन इतनी तगड़ी टक्कर की उम्मीद कांग्रेस ने नहीं की है। कांग्रेस की सरकार होने का बावजूद नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 62 सीटें मिली। पार्टी ने कम के कम 72 सीटों की उम्मीद लगाई थी। वहीं, पार्टी के प्रधान सुनील जाखड़ ने इसे बड़ी जीत बताया है। जाखड़ का कहना है कि पार्टी ने लगातार चौथे नगर निगम पर पर बड़ी जीत हासिल की है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि कई वार्डो में विपक्ष से कड़ी चुनौती मिली।

Posted By: Jagran

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