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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Punjab News: चरणजीत सिंह चन्नी की सांसदी को चुनौती, नामांकन पत्र में झूठी जानकारी देने के लगे आरोप

Published: Wed, 31 Jul 2024 10:39 PM (IST)

जालंधर लोकसभा सीट से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) की सांसदी पर मुसीबत की तलवार लटक गई है। ...और पढ़ें

रणजीत सिंह चन्नी की सांसदी को चुनौती, हाईकोर्ट में होगी सुनवाई (फाइल फोटो)।
रणजीत सिंह चन्नी की सांसदी को चुनौती, हाईकोर्ट में होगी सुनवाई (फाइल फोटो)।

HighLights

  1. जालंधर सीट पर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की सांसदी को चुनौती
  2. नामांकन पत्र में झूठी और अधूरी जानकारी देने के लगे आरोप
  3. 12 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका पर होगी सुनवाई

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। जालंधर लोकसभा सीट से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) का निर्वाचन जन प्रतिनिधि अधिनियम के तहत रद करने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर 12 अगस्त को सुनवाई तय की है।

याचिका दाखिल करते हुए स्थानीय निवासी गौरव लूथरा ने एडवोकेट मनित मल्होत्रा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि जालंधर लोकसभा सीट से चरणजीत सिंह चन्नी सांसद निर्वाचित हुए थे। याची ने बताया कि नामांकन पत्र भरते हुए उन्होंने बहुत सी जानकारियां छुपाई थी।

इन खर्चों का नहीं दिया ब्योरा

इसके साथ ही उन्होंने चुनाव में हुए खर्च का भी सही ब्योरा आयोग को नहीं सौंपा है। चुनाव के दौरान एक होटल में 24 घंटे खाने की व्यवस्था रहती थी लेकिन इसका खर्च उन्होंने चुनाव प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया। वह रोजाना 10-15 जन सभाएं करते थे लेकिन इस दौरान एक भी वाहन का खर्च उन्होंने प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया।

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रामा मंडी में बिना अनुमति किया रोड शो

रामा मंडी में उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया। यहां तक की पोलिंग बूथ के बाहर वोटर स्लिप बांटने के लिए जो बूथ स्थापित किए गए थे उनके खर्च का ब्योरा भी नहीं दिया गया। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि चुनाव जीतने के लिए चन्नी ने भ्रष्ट साधनों का इस्तेमाल किया और इसके लिए जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत उनका निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए।

याची ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत भी दी थी लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे में अब याची को चुनाव याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।

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