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चंडीगढ़ वालों को मिलेंगी 2 नई झील, जंगलों में प्राकृतिक गड्ढों का बदलेगा स्वरूप, दो साल में सिरे चढ़ सकता प्लान

Published: Sat, 03 Oct 2026 01:25 PM (IST)

चंडीगढ़ में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए दो नई झीलें विकसित की जाएंगी। ये झीलें प्राकृतिक गड्ढों में बनाई ...और पढ़ें

प्राकृतिक गड्ढों को झील के रूप में विकसित किया जाएगा। (एआई जनरेटेड फोटो)

प्राकृतिक गड्ढों को झील के रूप में विकसित किया जाएगा। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए दो नई झीलें।

  2. वन्यजीवों को गर्मी में पानी, आबादी की ओर आना रुकेगा।

  3. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी झील।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बड़ा कदम बढ़ाया जा रहा है। इसी मकसद से सिटी ब्यूटीफुल के जंगलों में दो नई वॉटर बॉडीज (झीलें) विकसित करने की तैयारी है। ये झीलें प्राकृतिक गड्ढों में ही विकसित की जाएंगी।

पहली झील पटियाला की राव के साथ धनास के पास लगते जंगल और दूसरी सुखना चो में सुखना लेक के नीचे वाले हिस्से में दड़वा या हल्लोमाजरा से सटे जंगली एरिया में बनाने का प्रस्ताव है। इससे ग्राउंड वाॅटर लेवल सुधरेगा और आसपास के ग्रीन एरिया को भी सीधा फायदा मिलेगा। सॉइल-मॉइश्चर कंजर्वेशन को भी मजबूती मिलेगी।

झीलें पयर्टन के बजाय पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि मूल जंगल से कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। दो नई झीलें बनाने के प्रोजेक्ट के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून से पर्यावरणीय मंजूरी मांगी है।

डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट के बाद ही झील बनाने का कार्य शुरू होगा। सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो अगले दो साल में चंडीगढ़ वासियों को सुखना लेक के अलावा जंगल के बीच दो नई झीलों पर सैर का अवसर मिलेगा।

क्यों जरूरत पड़ी नई झीलों की?

सुखना झील चंडीगढ़ की लाइफलाइन है, लेकिन पिछले कुछ सालों में उसकी जलभराव क्षमता 50 फीसदी तक घट गई है। गाद न हटाए जाने और कैचमेंट एरिया में पानी कम आने की वजह से हर साल गर्मियों में झील सूखने लगती है।

प्रशासन ने डब्ल्यूआईआई के साथ मिलकर 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान बनाया है। इसमें डी-सिल्टिंग, बांध की ऊंचाई बढ़ाने और नए वाॅटर सोर्स बनाने पर जोर है।

जंगलों में नई झीलें बनाना भी इसी का हिस्सा हैं। इन झीलों में बरसाती पानी स्टोर होगा, जो धीरे-धीरे जमीन में रिचार्ज होगा और सुखना चो के जरिये सुखना लेक को भी पानी दिया जाएगा।

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वन्यजीवों और पर्यटन को फायदा

सुखना के जंगलों में तेंदुआ, जंगली सुअर, सांभर, मोर समेत कई प्रजातियां के वन्यजीव और जानवर पाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में उन्हें पानी की तलाश में आबादी की तरफ आना पड़ता है। जंगल में झील बनने से वन्यजीव और जानवरों को फायदा मिलेगा।

सुखना सेंक्चुरी में वन्यजीवों का कुनबा बढ़ा

सुखना वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में चार साल के अंतराल के बाद हुए व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण ने यहां की जैव विविधता की पहले से कहीं विस्तृत तस्वीर सामने रखी है। डब्ल्यूआइआई की 2025 की सर्वे रिपोर्ट में 16 स्तनधारी, 132 पक्षी, 73 तितली और 13 सरीसृप-उभयचर प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 43 वृक्ष, 14 झाड़ी और 22 शाकीय प्रजातियों की भी पहचान की गई है।

मानसून सीजन में 3 लाख पौधे लगे

शहर को हरा-भरा बनाने के लिए पौधे लगाने के बाद अब उनके बचने की भी जवाबदेही तय होगी। इस मानसून सीजन में चंडीगढ़ में 3.15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें करीब तीन लाख पौधे लगाए जा चुके हैं।

अब वन विभाग इन पौधों की वास्तविक स्थिति की जांच कराएगा। खास बात यह है कि पौधे लगाने वाला विभाग खुद उनकी जांच नहीं करेगा। दूसरे विभागों के अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों की थर्ड पार्टी कमेटियां मौके पर जाकर पौधों की सर्वाइवल रिपोर्ट तैयार करेंगी।

पहली जांच नवंबर में और दूसरी मार्च 2027 में होगी। दोनों रिपोर्ट के आधार पर पौधों के बचने की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद प्रशासक गुलाब चंद कटारिया खुद सर्वाइवल रेट की समीक्षा करेंगे। इससे विभागों पर सिर्फ पौधे लगाने का नहीं, बल्कि उन्हें बचाने का भी दबाव रहेगा।