सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने हाल ही में अभिवभकों की शिकायत पर एक स्कूल की महिला टीचर को नौकरी से निकाल दिया था। नियमों की अनदेखी कर टीचर को नौकरी से निकाला गया है। यह आरोप शिक्षिका समीक्षा शर्मा ने लगाए हैं। स्कूल टीचर समीक्षा शर्मा कांट्रैक्ट टीचर है और उसकी ज्वाइनिंग समग्र शिक्षा अभियान के तहत हुई थी, लेकिन उसे नौकरी से निकालने से पहले नियमों को फालो नहीं किया गया और बिना किसी एडवांस नोटिस दिए शिक्षिका को नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत नौकरी छोड़ने से एक महीने पहले नोटिस देना जरूरी है। यह नियम विभाग और शिक्षक पर एक सामान लागू होता है। शिक्षिका का कांट्रैक्ट 31 मार्च को खत्म किया गया तो विभाग को यह जानकारी उसे एक महीना पहले फरवरी में देनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने बिना कोई नोटिस दिए कांट्रैक्ट पूरा होने के 38 दिन बाद लेटर जारी कर शिक्षिका समीक्षा शर्मा को नौकरी से निकाल दिया।

शिक्षा सचिव ने दोबारा करवाई मामले की जांच, लेकिन हुई खानापूर्ति

नौकरी से निकाले जाने के बाद शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि उसका पक्ष जाने बिना ही विभाग ने उसे नौकरी से निकाल दिया। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा सचिव ने शिक्षिका समीक्षा शर्मा के केस दोबारा ओपन करवाया है। शिक्षिका को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। इनक्वारी कमेटी की कार्यकारी डायरेक्टर रविंद्र कौर ने शिक्षिका को बताया स्कूल में उसकी क्लास का रिजल्ट 80 से 85 फीसद रह गया है। इसके इलावा प्रिंसिपल द्वारा दिए गए कार्यों को भी वह पूरा नहीं करती। प्रिंसिपल की इन्ही शिकायतों को कमजोर प्रदर्शन और अन्य शिकायतों का आधार बनाकर उसे नौकरी से निकाला गया है। वहीं, टीचर समीक्षा शर्मा ने आरोप लगाया कि जब उसे उसका पक्ष बताने के लिए बुलाया गया था तो उसकी कोई बात नहीं सुनी गई। समीक्षा शर्मा जेबीटी टीचर है, लेकिन उससे स्कूल में पीजीटी, टीजीटी की सेवाएं ली जा रही थी।

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"शिक्षा सचिव के निर्देशानुसार शिक्षिका को शिकायतों की जानकारी दी गई है। मामले की रिपोर्ट शिक्षा सचिव को दी जाएगी।

                                                                           -रविंदर कौर, डिप्टी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन

Edited By: Ankesh Thakur