मकानों का मिलेगा मालिकाना हक, कमर्शियल प्राॅपर्टी होगी फ्री होल्ड; शाह के दावे से चंडीगढ़वासियों को जगी उम्मीद
गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ के तीन लंबित मुद्दों पर महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना ...और पढ़ें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को चंडीगढ़वासियों में जगा गए नई उम्मीद। फोटो: संजय घिल्डियाल
HighLights
22 हजार परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक।
8,600 संपत्तियां अब होंगी फ्रीहोल्ड।
औद्योगिक क्षेत्रों में एफएआर बढ़ेगा।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर के तीन काफी समय से लंबित मुद्दों का समाधान होने जा रहा है, जिसकी घोषणा गृह मंत्री अमित शाह ने की है। उसमें पुनर्वास काॅलोनियों में मकानों का मालिकाना हक देने और लीजहोल्ड व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी सहमति दी गई है। इन तीनों फैसलों से हजारों परिवारों, कारोबारियों और विशेष रूप से औद्योगिक इकाइयों को लाभ मिलेगा। यह मुद्दे लोकसभा में भी उठ चुके हैं।
पुनर्वास काॅलोनियों में मालिकाना हक का मुद्दा चार दशक से अधिक समय से लंबित है। प्रशासन की योजना के तहत करीब 34,965 मकानों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव है, लेकिन पहले चरण में इसका लाभ केवल करीब 22 हजार मूल आवंटियों को मिलेगा। इनसे निर्धारित शुल्क लेकर मालिकाना हक दिया जाएगा।
जिन लोगों ने मूल आवंटियों से पावर ऑफ अटाॅर्नी (जीपीए) या अन्य माध्यमों से मकान खरीदे हैं, उन्हें फिलहाल इसका लाभ नहीं मिलेगा। यानी करीब 13 हजार मकानों के बाद के खरीदार अभी योजना से बाहर रहेंगे। फरवरी 2026 में प्रशासन ने इस संबंध में कमेटी गठित कर नियम तैयार किए थे।
8,600 संपत्तियां होंगी फ्रीहोल्ड
दूसरा बड़ा फैसला व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने का है। शहर में करीब 15,016 औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनमें लगभग 8,600 लीजहोल्ड हैं। फ्रीहोल्ड होने से मालिकों को संपत्ति बेचने, हस्तांतरित करने और बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी। यह मांग दो दशक से अधिक समय से लंबित थी।
प्रशासन ने अप्रैल 2021 में गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मांगी थी। अगस्त 2022 में मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी मांगी। जुलाई 2024 में प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। इसके बाद मई 2026 में प्रशासन ने नए सिरे से प्रस्ताव भेजा। अब गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद घोषणा का इंतजार है।
एफएआर बढ़ने से उद्योगों को मिलेगा विस्तार का मौका
तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा औद्योगिक क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाने का है। मास्टर प्लान-2031 में संशोधन के तहत औद्योगिक इकाइयों को मौजूदा प्लाट पर अधिक निर्माण क्षेत्र उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इससे उद्योगपति अपनी मौजूदा जमीन पर अतिरिक्त फ्लोर और उत्पादन संबंधी सुविधाएं विकसित कर सकेंगे।
गोदाम, कार्यालय, कर्मचारियों और अन्य व्यावसायिक जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त जगह मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक फायदा औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 के उन उद्यमियों को होगा, जिन्हें सीमित प्लाट में बढ़ती कारोबारी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होती है।
एफएआर बढ़ने से नई जमीन खरीदने की जरूरत कम हो सकती है। इससे निर्माण लागत और विस्तार के खर्च पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। साथ ही औद्योगिक संपत्तियों की उपयोगिता और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। प्रशासन ने फेज-1 और 2 में एफएआर 2.0 करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इतना होने पर उद्योगपति दो हजार वर्ग तक का निर्माण कर पाएगा।
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