कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़। चंडीगढ़ के साथ लगते शहर मोहाली के जीरकपुर में परिवार के साथ रहने वाला 10 साल का बच्चा चंडीगढ़ स्थित एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में एग्जाम देने आया था लेकिन वह वापस घर नहीं पहुंचा। बच्चा लापता होने के बाद घरवालों ने उसे सभी जगह ढूंढा लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं लगा। इसके बाद घरवालों ने चंडीगढ़ पुलिस को बच्चे के गुम होने की शिकायत दी। वहीं, चंडीगढ़ पुलिस बेटे के गुम होने के गम में डूबे मां-बाप के चेहरे पर खुशी ले आई। यूटी पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद शहर से गायब हुए नाबालिग को ढूंढ निकाला।

जानकारी के अनुसार ऑपरेशन मुस्कान के तहत सेक्टर-31 थाना पुलिस ने पेपर देने गए किशोर के गायब होने के दस दिन बाद उसे पंजाब के अमृतसर से ढूंढ निकाला। पुलिस के अनुसार जीरकपुर के सलेश भट्टनागर ने पुलिस को बेटे के गुम होने की शिकायत दी थी। शिकायत में सलेश ने बताया कि उनका बेटा अक्षत भट्टनागर 14 नवंबर को इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पेपर देने गया था। इसके बाद से वो घर नहीं लौटा। शिकायत मिलने के बाद थाना प्रभारी रंजीत सिंह ने एएसपी साऊथ श्रुति अरोड़ा के सुपरविजन में टीम का गठन कर बच्चे की तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस ने चंडीगढ़ सहित पंचकूला और मोहाली में भी उसे ढूंढा लेकिन बच्चे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने आरपीएफ से संपर्क किया, जिसके बाद वीरवार को पुलिस टीम को अमृतसर आरपीएफ ने बताया कि नाबालिग को पंजाब के अमृतसर में देखा गया है। सूचना पाते पुलिस की एक टीम अमृतसर रवाना हुई और किशोर को चंडीगढ़ वापस लेकर आई। इसके बाद पुलिस ने किशोर को घरवालों को सौंप दिया।

घरवालों की डांट के डर से अमृतसर पहुंच गया था अक्षत

पुलिस ने बताया कि जब बच्चे की काउंसलिंग की गई तो उसने बताया कि 14 नवंबर को वह घर से चंडीगढ़ स्थित एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पेपर देने आया था। एग्जाम स्कॉलरशिप को लेकर था। अक्षत स्कॉलरशिप लेने में कामयाब नहीं हो पाया तो वह घर वालों की डांट के डर से घर ही नहीं गया। अक्षत चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से अमृतसर वाली ट्रेन पर चढ़ गया और अमृतसर जा पहुंचा। 

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट भी घर पहुंचा रही बच्चे

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर मिलने वाले बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन टीम रेस्क्यू कर मेडिकल करवाने के बाद मलोया स्थित स्नेहालय में पहुंचाकर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सूचना देती है। पुलिस ने वर्ष 2017 में 44, 2018 में 15 और 2019-20 के डेढ़ साल में 86 बच्चों को परिवार तक पहुंचाया। टेक्नोलॉजी के साथ काम करने पर वर्ष 2019-20 में ज्यादा जल्दी बच्चों को घर पहुंची रही हैं।

इन राज्यों के बच्चे शामिल

अपने स्वजनों के पास वापस लौटे सात बच्चों की उम्र आठ वर्ष या आसपास की थी। इसमें सबसे ज्यादा दिल्ली, राजस्थान, बंगाल, ओडिसा, असम, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार के बच्चे बाल मजदूरी और भीख मंगवाने वाले गिरोह के जाल में फंसे थे।

Edited By: Ankesh Thakur