चंडीगढ़ निगम में भ्रष्टाचार का खेल, सेनिटरी इंस्पेक्टर के पकड़े जाने पर उठे सवाल; स्वतंत्र जांच की मांग
चंडीगढ़ नगर निगम के एमओएच विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। पूर्व उपमहापौर सतीश कैंथ ने प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ...और पढ़ें

एमएचओ के अफसरों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे।
HighLights
पूर्व उपमहापौर कैंथ ने भ्रष्टाचार की जांच की मांग की।
डंपिंग साइट खर्चों में अनियमितता का आरोप।
प्रशासक को पत्र लिखकर कार्रवाई की अपील।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (एमओएच) विभाग के अफसरों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इस संबंध में पूर्व उपमहापौर सतीश कैंथ ने प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एमओएच विभाग लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतों के कारण सवालों के घेरे में है, लेकिन पहले की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कैंथ ने पत्र में कहा कि चंडीगढ़ की सिविल सोसायटी, एनजीओ और पार्षदों की ओर से डंपिंग साइट पर होने वाले खर्च और टेंडरों में कथित अनियमितताओं को लेकर कई बार शिकायतें की गईं।
इसके बावजूद इन शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। अब सेनिटरी इंस्पेक्टर से जुड़े पांच लाख रुपये की रिश्वत के मामले के सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के अंदर इस मामले को लेकर चर्चा है कि एमओएच विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी थी। कैंथ ने प्रशासक से सवाल किया कि यदि विभाग में इस तरह की गतिविधियां हो रही थीं तो इसकी जवाबदेही किसकी तय की जाएगी।
पूर्व उपमहापौर ने पत्र में पिछले वर्षों में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से मिलने वाले पैसे का सही इस्तेमाल होना चाहिए और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने भाजपा पर भी इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।
कैंथ ने प्रशासक द्वारा शहर में कैंप लगाकर लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इसी तरह नगर निगम के स्तर पर भी भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासक से एमओएच विभाग की स्वतंत्र जांच करवाने, जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। कैंथ ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लोगों का नगर निगम की व्यवस्था से भरोसा और कमजोर होगा।
