चंडीगढ़ नगर निगम में भ्रष्टाचार, बड़े अफसरों पर भी आरोप, स्वतंत्र लोकपाल नियुक्त करने की मांग
चंडीगढ़ नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद स्वतंत्र लोकपाल नियुक्त करने की मांग उठी है। प्रशासक की सलाहकार ...और पढ़ें

चंडीगढ़ नगर निगम में रिश्वत का खेल। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
सीबीआई कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ निगम में लोकपाल की मांग।
अजय जग्गा ने प्रशासक को पत्र लिखकर की सिफारिशें।
निगरानी के लिए विशेषज्ञ उपसमिति का भी सुझाव।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम के एक इंस्पेक्टर की पांच लाख रिश्वत मामले में बड़े अफसरों पर भी आरोप लगे हैं। सीबीआई की कार्रवाई के बाद नगर निगम में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर निगरानी के लिए स्वतंत्र लोकपाल नियुक्त करने की मांग उठी है।
प्रशासक की सलाहकार परिषद के सदस्य एवं अधिवक्ता अजय जग्गा ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर नगर निगम के लिए स्वतंत्र लोकपाल की व्यवस्था करने और राजस्व एवं वित्तीय मामलों के लिए विशेषज्ञों की उपसमिति गठित करने का आग्रह किया है।
अजय जग्गा ने पत्र में कहा कि वह पिछले कई वर्षों से नगर निगम में स्वतंत्र लोकपाल की नियुक्ति की मांग उठाते रहे हैं। हाल ही में नगर निगम के एक इंस्पेक्टर के खिलाफ पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में सीबीआई की कार्रवाई ने नगर निगम की मौजूदा जवाबदेही व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को फिर उजागर किया है।
उन्होंने कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया अपना काम करेगी, लेकिन ऐसी घटनाएं भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतों की स्वतंत्र जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता दर्शाती हैं।
250 करोड़ के एजेंडे रद होने का भी दिया हवाला
जग्गा ने पत्र में करीब 250 करोड़ रुपये के एजेंडों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इन एजेंडों को पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना पारित किए जाने के आरोपों के बीच बाद में नगर निगम सदन ने इन्हें रद कर दिया था।
उनके अनुसार, सार्वजनिक धन से जुड़े इतने बड़े वित्तीय फैसलों का पारित होने के बाद निरस्त होना मौजूदा निगरानी और जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसी परिस्थितियों में स्थायी और स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र जरूरी है, ताकि वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताओं का समय रहते पता लगाया जा सके।
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13वें वित्त आयोग की सिफारिश का किया जिक्र
अजय जग्गा ने पत्र में 13वें वित्त आयोग की स्थानीय निकायों के लिए स्वतंत्र लोकपाल की व्यवस्था संबंधी सिफारिश का हवाला देते हुए कहा कि चंडीगढ़ में नगर निगम के लिए समर्पित वैधानिक लोकपाल की व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।
प्रस्तावित लोकपाल नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदाचार, अधिकारों के दुरुपयोग, प्रक्रियागत खामियों और सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र समीक्षा कर सकेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इसके लिए संबंधित कानून में संशोधन या अन्य वैधानिक व्यवस्था की संभावनाएं तलाशी जाएं।
वित्तीय स्वायत्तता के साथ जवाबदेही भी जरूरी
पत्र में हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए जग्गा ने कहा कि नगर निकायों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने की मांग के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने तर्क दिया कि वित्तीय अधिकार बढ़ने के साथ सार्वजनिक धन के उचित इस्तेमाल और निर्णयों की प्रभावी समीक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
छह विशेषज्ञों की उपसमिति बनाने का सुझाव
जग्गा ने नगर निगम के लिए राजस्व एवं वित्तीय सलाहकार परिषद गठित करने का अपना पुराना सुझाव भी दोहराया है। उन्होंने इसे प्रशासक की सलाहकार परिषद के अधीन उपसमिति के रूप में गठित करने और इसमें अधिकतम छह विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
इन विशेषज्ञों को वित्त, कराधान, नगर प्रशासन, सार्वजनिक नीति और राजस्व प्रबंधन का अनुभव होना चाहिए। यह समिति नगर निगम को राजस्व बढ़ाने, खर्च को तर्कसंगत बनाने, वित्तीय अनुशासन कायम रखने और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के संबंध में सुझाव दे सकेगी।
जग्गा ने प्रशासक से दोनों प्रस्तावों पर जल्द विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि इन व्यवस्थाओं से नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और शहरवासियों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
