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'दलबदलुओं को टिकट नहीं, वोट भी नहीं!' चंडीगढ़ निगम चुनाव से पहले सेकेंड इनिंग एसोसिएशन की वोटर्स से बड़ी अपील

Published: Sun, 13 Sep 2026 02:08 PM (IST)

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2026 से पहले सेकेंड इनिंग एसोसिएशन ने दलबदलुओं को टिकट न देने और जनता से उन्हें वोट न देने की अपील की है।

वोट देने से पहले उम्मीदवार से पूछें 5 सवाल।

वोट देने से पहले उम्मीदवार से पूछें 5 सवाल।

HighLights

  1. सेकेंड इनिंग एसोसिएशन ने दलबदलू नेताओं का विरोध किया

  2. आरके गर्ग ने राजनीतिक दलों से निष्ठा देखने को कहा

  3. मतदाताओं से उम्मीदवारों से पांच सवाल पूछने की अपील

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक दलों में टिकटों की कवायद शुरू होने के बीच सेकेंड इनिंग एसोसिएशन ने दलबदल की राजनीति पर सवाल उठाए हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे केवल उम्मीदवार की जीतने की क्षमता को आधार न बनाएं, बल्कि उसकी राजनीतिक निष्ठा, विश्वसनीयता और जनता के बीच उसकी छवि को भी टिकट का आधार बनाएं।

आरके गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ की स्थानीय राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने समय-समय पर राजनीतिक दल बदले हैं। यदि मौजूदा पार्षदों में लगभग हर तीन में से एक ने अपने राजनीतिक सफर में दल बदला है, तो इसे केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह राजनीतिक निष्ठा और जनता के विश्वास से जुड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि दल बदलना अपने आप में अपराध नहीं है। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को अपने विचार बदलने और राजनीतिक दल बदलने का अधिकार है। लेकिन यदि दल बदलने का मुख्य कारण टिकट, पद या राजनीतिक अवसर हासिल करना है, तो मतदाताओं को ऐसे उम्मीदवारों से सवाल पूछने चाहिए।

जनता पूछे उम्मीदवार से पांच सवाल

गर्ग ने कहा कि मतदाताओं को उम्मीदवार से यह जानना चाहिए कि उसने दल क्यों बदला? क्या इसके पीछे कोई स्पष्ट वैचारिक या नीतिगत कारण था? पुराने दल और उसके कार्यकर्ताओं के प्रति उसकी क्या जवाबदेही रही? यदि पुराने दल से टिकट नहीं मिलता तो क्या वह दल बदलता? और भविष्य में राजनीतिक समीकरण
बदलने पर क्या वह फिर दल बदलेगा?

उन्होंने कहा कि ये सवाल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा हैं।

वर्षों से काम करने वालों को मिले मौका

सेकेंड इनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक दलों को उन कार्यकर्ताओं की निष्ठा और मेहनत का भी सम्मान करना चाहिए, जो वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। चुनाव के समय दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट देकर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी करना स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का संदेश नहीं देता।

उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार का आकलन केवल उसकी चुनावी जीत की संभावना से नहीं होना चाहिए। पार्षद को पांच साल तक सफाई, पानी, सड़क, पार्क, कूड़ा, स्ट्रीट लाइट, संपत्ति कर और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर जनता के बीच रहकर जवाब देना होता है।

आरके गर्ग ने कहा कि पार्टियां टिकट देने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन वोट देने के लिए जनता भी स्वतंत्र है। इसलिए 2026 के नगर निगम चुनाव में मतदाताओं को उम्मीदवार का चेहरा ही नहीं, बल्कि उसका पूरा राजनीतिक सफर भी देखना चाहिए।

उन्होंने कहा, “टिकट पार्टी का हो सकता है, लेकिन वोट जनता का है। दल बदलकर टिकट मिल सकता है, लेकिन जनता का विश्वास अपने आप नहीं मिलता।”
एसोसिएशन ने अपील की कि इस बार चुनाव का सवाल केवल यह न हो कि कौन जीतेगा, बल्कि यह भी हो कि कौन अपने सिद्धांतों और जनता के साथ खड़ा रहा और कौन सिर्फ टिकट के साथ खड़ा रहा।

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