MOH से सेनिटरी और एंफोर्समेंट तक..., भ्रष्टाचार के मामलों से घिरा चंडीगढ़ नगर निगम का पूरा सिस्टम
चंडीगढ़ नगर निगम के एमओएच, सेनिटरी और एंफोर्समेंट विंग में रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के कई मामले सामने आए हैं। ...और पढ़ें

नगर निगम में भ्रष्टाचार के बाद सवालों के घेरे में अधिकारी, पहले भी कई मामलों में रंगे हाथ धरे। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
सेनिटरी इंस्पेक्टर 5 लाख रिश्वत लेते सीबीआई ने दबोचा।
एमओएच विंग में पहले भी कई अधिकारी दोषी पाए गए।
निगम में भ्रष्टाचार पर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम के एमओएच (मेडिकल आफिसर आफ हेल्थ), सेनिटरी, साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट और एंफोर्समेंट विंग में सामने आए रिश्वत और अवैध वसूली के मामलों ने निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में इन विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई से लेकर अदालत में आरोप तय होने और सजा तक के मामले सामने आ चुके हैं। अब सेनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते सीबीआई द्वारा रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद फिर से निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीबीआई के अनुसार शक्ति शर्मा ठेकेदार की फर्म के लंबित और भविष्य के बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले 14 लाख रुपये मांग रहा था। ट्रैप लगाकर पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते उसे पकड़ा गया।
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2019 में सेनिटरी इंस्पेक्टर पकड़ा, हो चुकी सजा
एमओएच विंग में भ्रष्टाचार का मामला नया नहीं है। 17 अगस्त 2019 को सेनिटरी इंस्पेक्टर नरेश कुमार को 2500 रुपये रिश्वत लेते विजिलेंस ने रंगे हाथ पकड़ा था।
शिकायतकर्ता निगम का ही कर्मचारी था, जिसने सेक्टर-29 में दोबारा तैनाती के लिए रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। मार्च 2025 में अदालत ने नरेश कुमार को इस मामले में चार साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
2023 में चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर और हेल्थ सुपरवाइजर की गिरफ्तारी
आठ अगस्त 2023 को सीबीआई ने एमओएच विंग के चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर चंद्रमोहन और हेल्थ सुपरवाइजर संदीप धनखड़ को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
आरोप था कि एक हटाए गए सेनिटरी इंस्पेक्टर को दोबारा नौकरी पर लगवाने के लिए दो लाख रुपये की मांग की गई थी और एक लाख रुपये पहली किस्त के तौर पर लिए जा रहे थे।
बाद में सीबीआई ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और सितंबर 2024 में विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ आरोप तय किए। चंद्रमोहन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग मामला भी चल रहा है।
एंफोर्समेंट में वीडियो से शुरू हुआ मामला, विजिलेंस की एफआईआर
2025 में एंफोर्समेंट विंग के बेलदार विकास ने वीडियो जारी कर इंस्पेक्टरों पर वेंडरों से कथित वसूली के आरोप लगाए थे। बाद में उसने वीडियो वापस लेने के बाद फिर आरोप दोहराए और दबाव में दूसरा वीडियो बनाने का आरोप लगाया। निगम ने पहले कर्मचारियों की ड्यूटी बदली और बाद में विजिलेंस जांच की सिफारिश की।
इस मामले में अब स्थिति और आगे बढ़ चुकी है। अगस्त 2026 में विजिलेंस ने एंफोर्समेंट विंग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज की। इसी तरह से साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों में भी एजेंसी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं।
अधिकारी गायब, सीबीआई का डर तो नहीं
वीरवार को नगर निगम भवन में सन्नाटा पसरा रहा। निगम कमिश्नर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर और दूसरे कई अधिकारी दफ्तरों में नहीं मिले। निगम कमिश्नर अमित कुमार तो दिल्ली में थे। वहीं ज्वाइंट कमिश्नर भी कमरों में नहीं मिले। चर्चा यह हो रही थी कि कहीं सीबीआई आने का डर तो इसका कारण नहीं है। ज्वाइंट कमिश्नर तो इस मामले के बाद से ही फोन तक नहीं उठा रहे।
