जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम में हर साल मेयर चुना जाता है। साल 2023 में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। हालांकि मेयर चुनाव को अभी 3 माह का समय है। भाजपा आप और कांग्रेस पार्षदों को अपनी पार्टी शामिल करवाने की जुगत में लगी है। वहीं आम आदमी पार्टी भी मेयर चुनाव जीतने के लिए खुद को मजबूत बता रही है। 

नगर निगम में इस समय किसी भी दल के पास मेयर चुनाव जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। निगम में आप के 14, भाजपा के 14, कांग्रेस के छह और अकाली दल का एक पार्षद है। इस साल जनवरी में हुए मेयर चुनाव में कांग्रेस ने बहिष्कार किया था, जिस कारण भाजपा और आप में कड़ी टक्कर के बावजूद भाजपा अपना मेयर बनाने में कामयाब हुई थी। हालांकि आप ने चुनाव को अवैध बताते हुए पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है। मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

चुनाव में कांग्रेस पार्षदों का रोल काफी अहम

अगले साल होने वाले मेयर चुनाव में कांग्रेस भी हिस्सा लेगी। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी या या आप या भाजपा में से किसी एक को समर्थन देगी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की स्पष्ट कर चुके है कि मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्षदों की स्थिति काफी अहम रहेगी। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्षद एकजुट हैं। 

भाजपा में शामिल हो सकते हैं विरोधी पार्षद

मेयर चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए विरोध खेमे में सेंध लगा सकती है। भाजपा विपक्षी दल आप और कांग्रेस के 3 से चार पार्षद तोड़कर अपने दल में शामिल करवा सकती है। अगर भाजपा ऐसा करने में कामयाब रही तो मेयर चुनाव में जीत पक्की है। भाजपा को इस बात का खतरा बना हुआ है कि चुनाव के लिए कांग्रेस और आप दोनों आपस में मिल सकते हैं। 

कांग्रेस के समर्थन से आप बना सकती है मेयर

अगर आम आदमी पार्टी को मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो आप का मेयर चुनाव में जीत पक्की हो जाएगी। क्योंकि आप के पास 14 पार्षद हैं और 6 पार्षद कांग्रेस के हैं। ऐसे में कुल 20 वोट आप के खेमे में हो जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो आप अपना मेयर उम्मीदवार चुनाव के लिए खड़ा करेगी और सीनियर डिप्टी मेयर का पद कांग्रेस को दे सकती है।

भाजपा के पास 15 वोट

भाजपा मेयर चुनाव के लिए भाजपा के पास कुल 15 वोट हैं। पार्टी के 14 पार्षद हैं और एक वोट सांसद का है। चंडीगढ़ में सांसद किरण खेर भाजपा समर्थित है। सांसद का वोट भी मेयर चुनाव में मान्य है। ऐसे में भाजपा को कुल 3 से चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

अकाली पार्षद की स्थिति अभी क्लियर नहीं

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का एक पार्षद है और उसकी स्थिति साफ नहीं है कि किस दल को समर्थन दे सकता है। पिछली बार अकाली पार्षद हरदीप सिंह ने मतदान नहीं किया था। ऐसे में अकाली न तो कांग्रेस, न ही भाजपा और आप के साथ जा सकती है। 

Edited By: Ankesh Thakur

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