चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का बड़ा फैसला, 17 हजार छोटे प्लॉटों के बकाया ब्याज में छूट
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने हजारों मकान मालिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवंटियों के लिए चार अहम फैसले लिए हैं।
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का बड़ा फैसला, 17 हजार छोटे प्लॉटों के बकाया ब्याज में छूट (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
GPA रजिस्ट्री के लिए छह महीने की मोहलत।
छोटे प्लॉटों पर बकाया ब्याज माफ करने की सिफारिश।
1700 प्लॉटों का मासिक किराया घटाने का प्रस्ताव।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने शहर के हजारों मकान मालिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवंटियों को राहत देने की दिशा में चार अहम फैसले लिए हैं।
बोर्ड ने जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटार्नी), एग्रीमेंट टू सेल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मकानों का हस्तांतरण करवाने वाले लोगों को एक और मौका देने का निर्णय लिया है।
इसके लिए छह महीने की अवधि के लिए आवेदन की विंडो दोबारा खोली जाएगी। इसके अलावा छोटे प्लॉटों पर बकाया ब्याज माफ करने और कुछ आवंटियों का मासिक किराया घटाने की सिफारिश भी चंडीगढ़ प्रशासन से की गई है। हालांकि इन फैसलों पर अंतिम मंजूरी प्रशासक की ओर से दी जाएगी।
जीपीए के मामलों में छह महीने का मौका
बोर्ड के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में जीपीए और बिना पंजीकृत दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरण को वैध नहीं माना था।
हालांकि आदेश से पहले ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किए गए हस्तांतरण के मामलों में राहत देने का प्रावधान किया गया था। इसी के तहत पहले भी आवेदन के लिए विंडो खोली गई थी, लेकिन कई लोग इसका लाभ नहीं उठा पाए। अब लोगों की मांग पर छह महीने के लिए यह अवसर दोबारा देने का निर्णय लिया गया है।
17 हजार छोटे प्लॉटों का ब्याज माफ करने की सिफारिश
वर्ष 2006 की स्माल प्लॉट योजना के तहत करीब 17 हजार आवंटियों का मासिक किराया 800 रुपये निर्धारित किया गया था। वर्ष 2020 में हाउसिंग बोर्ड ने बकाया किराये पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाने का निर्णय लिया था।
इससे कई आवंटियों पर ब्याज का बोझ बढ़ गया। बोर्ड ने अब बकाया ब्याज पूरी तरह माफ करने की सिफारिश प्रशासन को भेजने का निर्णय लिया है। इसमें शर्त रखी गई है कि आवंटी को मूल बकाया राशि जमा करवानी होगी।
1700 प्लॉटों का किराया 3000 से घटाकर 800 करने का प्रस्ताव
स्लम बस्तियों से हटाकर पुनर्वास योजना के तहत करीब 1700 लोगों को आवंटित छोटे प्लॉटों का मासिक किराया 3000 रुपये निर्धारित किया गया था। बोर्ड ने अब इसे घटाकर 800 रुपये करने की सिफारिश की है। इन आवंटियों पर लगे ब्याज को भी माफ करने का प्रस्ताव है।
बोर्ड की ओर से लिए गए चारों फैसलों को अब चंडीगढ़ प्रशासन के पास भेजा जाएगा। प्रशासक की मंजूरी मिलने के बाद ही आवंटियों को इन राहतों का लाभ मिल सकेगा।
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