चंडीगढ़ की विरासत नहीं सुरक्षित, दिनदहाड़े गायब हो रहे ली कार्बूजिए के डिजाइन किए सीवरेज ढक्कन; कीमत 15 लाख
चंडीगढ़ में ली कार्बुजिए द्वारा डिजाइन किए गए ऐतिहासिक सीवरेज ढक्कन और लोहे के बेंच चोरी हो रहे हैं, जिनकी ...और पढ़ें

पार्षद समेत लोगों का दावा है कि सीसीटीवी में दिखाई दे रहे युवकों का एक गिरोह है जो सीवरेज के ढक्कन चोरी करता है।
HighLights
पुलिस चौकी और सीसीटीवी कैमरों के बावजूद बेखौफ चोर।
रोजाना करीब एक दर्जन ढक्कन और लोहे के बेंच हो रहे चोरी।
विदेशों एक ढक्कन की कीमत 15 लाख रुपये तक का दावा।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल की पहचान और ऐतिहासिक विरासत अब चोरों के निशाने पर है। शहर के सीवरेज ढक्कन तक सुरक्षित नहीं हैं। चोर दिनदहाड़े शहर की सड़कों से सीवरेज के ढक्कन और लोहे के बेंच उखाड़कर ले जा रहे हैं, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
सेक्टर-34 थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रोजाना औसतन करीब एक दर्जन सीवरेज ढक्कन और लोहे के बेंच चोरी हो रहे हैं। हैरानी यह है कि कई वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हैं।
फुटेज पुलिस को सौंपे जाने और संदिग्धों के चेहरे सामने आने के बावजूद आरोपित अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब चोर कैमरों में कैद हैं, पुलिस चौकी मौजूद है और सबूत भी उपलब्ध हैं तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
यह मामला सिर्फ लोहे के ढक्कन चोरी होने तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ की स्थापत्य विरासत को नुकसान पहुंचाने का भी है। इन सीवरेज ढक्कनों पर चंडीगढ़ का नक्शा बना हुआ है। इन्हें प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बुजिए ने डिजाइन किया था।
ये ढक्कन शहर की ऐतिहासिक पहचान और हेरिटेज का हिस्सा हैं। इनकी कीमत कबाड़ के भाव से नहीं, बल्कि एंटीक वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय बाजार में आंकी जाती है।
दावा है कि चंडीगढ़ से चोरी किए गए ऐसे ढक्कन विदेशों के नीलामी घरों तक पहुंचते हैं और पूर्व में एक ढक्कन की नीलामी 15 लाख रुपये तक में हो चुकी है। यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह केवल स्थानीय चोरों का मामला नहीं, बल्कि शहर की विरासत को विदेशों तक पहुंचाने वाले संगठित गिरोह की ओर भी इशारा करता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ढक्कनों की चोरी लगातार जारी है। एक तरफ चोर ऐतिहासिक धरोहर को निशाना बना रहे हैं, दूसरी तरफ खुले मैनहोल लोगों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं।
रात के अंधेरे में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए ये खुले मैनहोल किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद चोरी रोकने और ढक्कनों की बरामदगी के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सवाल यह भी है कि चोरी किए गए इतने बड़े ढक्कन आखिर कहां खपाए जा रहे हैं और इन्हें शहर से बाहर ले जाने वाले नेटवर्क पर पुलिस की नजर क्यों नहीं है?
पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने उठाए सवाल
नगर निगम के वार्ड नंबर-34 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने सेक्टर-34 थाना क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि खासकर सेक्टर-45 में चोर बेखौफ होकर दिनदहाड़े वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज और जरूरी सबूत पुलिस को उपलब्ध करवाए गए हैं, लेकिन आरोपितों को पकड़ने में सफलता नहीं मिली।
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