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चंडीगढ़ की ऐतिहासिक कुर्सियां नीदरलैंड में नीलाम, 3000 यूरो में बिका हेरिटेज फर्नीचर

Published: Mon, 12 Oct 2026 03:31 PM (IST)

चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी पियरे जेनेरे की दो एक्स-लेग आर्मचेयर नीदरलैंड में 3000 यूरो में नीलाम हो गईं। अधिवक्ता ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में विरासत संरक्षण पर उठे सवाल।

चंडीगढ़ में विरासत संरक्षण पर उठे सवाल।

HighLights

  1. चंडीगढ़ की विरासत कुर्सियां नीदरलैंड में 3000 यूरो में बिकीं

  2. प्रशासन को सूचना के बावजूद नीलामी रोकने में विफल रहा

  3. अजय जग्गा ने जांच और फर्नीचर वापसी की मांग की

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी पियरे जेनेरे की डिजाइन की दो एक्स-लेग आर्मचेयर नीदरलैंड में 10 अक्टूबर को 3000 यूरो (करीब 3.21 लाख रुपये) में नीलाम कर दी गईं।

चंडीगढ़ प्रशासन को इस नीलामी की जानकारी 25 सितंबर को ही दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद नीलामी नहीं रुक सकी। अधिवक्ता एवं चंडीगढ़ प्रशासन की हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल (एचआइपीसी) के सदस्य अजय जग्गा ने इस मामले में केंद्र और चंडीगढ़ प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जांच और फर्नीचर को वापस लाने की मांग की है।

जग्गा ने 12 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि नीलामी से पहले सूचना दिए जाने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने पूछा कि जब संबंधित अधिकारियों को नीलामी की जानकारी पहले ही मिल गई थी, तो इसे रोकने के लिए जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

नीलामी कैटलॉग में दर्ज है चंडीगढ़ का नाम

नीदरलैंड की नीलामी में पियरे जेनेरे द्वारा डिजाइन की गई सागौन की लकड़ी और चमड़े से बनी दो एक्स-लेग आर्मचेयर शामिल थीं। नीलामी कैटलॉग में इनकी उत्पत्ति चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों से बताई गई थी।

जग्गा के अनुसार, नीलामी से पहले उन्होंने नीलामी घर को भी इस संबंध में सूचना दी थी, लेकिन इसके बावजूद कुर्सियों की बिक्री हो गई।

इससे पहले पेरिस में आर्टक्यूरियल नीलामी घर की 30 सितंबर को हुई नीलामी में पियरे जेनेरे की डिजाइन की एक कुर्सी भी सूचीबद्ध थी। उसके कैटलॉग में भी इसका संबंध चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों से बताया गया था। जग्गा ने इन मामलों को शहर की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

जांच के साथ वापस लाने की मांग

जग्गा ने अधिकारियों से पता लगाने की मांग की है कि फर्नीचर चंडीगढ़ से कब और किन परिस्थितियों में बाहर गया, इसे देश से निर्यात करने की अनुमति दी गई थी या नहीं और मौजूदा विक्रेता के पास वैध स्वामित्व से संबंधित कौन से दस्तावेज हैं।

उन्होंने नीलामी घर से स्वामित्व, खरीद, निर्यात और सीमा शुल्क से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की भी मांग की है।

उन्होंने कहा कि यदि विरासत के इन सामानों को अवैध तरीके से बाहर भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई कर इन्हें चंडीगढ़ वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

विरासत फर्नीचर की सुरक्षा के लिए एसओपी बनाने का सुझाव

जग्गा ने मांग की है कि विरासत से जुड़ी वस्तुओं की अवैध बिक्री की सूचना मिलने पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई जाए। इसके तहत संस्कृति विभाग सूचना मिलने पर पुलिस को भेजे, पुलिस आवश्यक जांच और एफआइआर की कार्रवाई करे तथा संस्कृति विभाग विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देश में नीलामी रोकने के लिए कदम उठाए।

उन्होंने चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं का केंद्रीय डाटाबेस बनाने, गायब या हटाए गए फर्नीचर का रिकॉर्ड तैयार करने और जरूरत पड़ने पर सीमा शुल्क, इंटरपोल तथा विदेशी नीलामी घरों के साथ समन्वय स्थापित करने का भी सुझाव दिया।

उनके अनुसार, शहर की विरासत को सामान्य व्यावसायिक सामान की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके संरक्षण और वापसी के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

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