ब्रिटिश काल में बने GRP थाने में असुरक्षित मालखाना, दीवार के अभाव में आरोपितों के भागने का जोखिम, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन स्थित जर्जर जीआरपी थाना और आवासीय क्वार्टरों के मामले में दायर जनहित ...और पढ़ें

जीआरपी थाने की मरम्मत, नवीनीकरण और उन्नयन के लिए संबंधित प्राधिकरणों को हाईकोर्ट ने दिया दो माह का समय।
HighLights
हाईकोर्ट ने दिया दो माह का समय।
मरम्मत और नवीनीकरण के आदेश।
कोर्ट ने कहा- सार्वजनिक सुरक्षा महत्वपूर्ण।
दयानंद शर्मा चंडीगढ़। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन स्थित गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) थाना एवं कर्मचारियों के आवासीय क्वार्टरों की जर्जर हालत है। छत से पानी टपकने, दीवारों में गहरी दरारें और गिरने की आशंका, खुले विद्युत तार, थाना भवन में असुरक्षित मालखाना, खिड़कियां, सीमा-दीवार के अभाव में आरोपितों के फरार होने का जोखिम तथा पीने के पानी और बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी है।
मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को मरम्मत, नवीनीकरण और उन्नयन के लिए दो माह का समय प्रदान किया है।
याचिकाकर्ता एडवाेकेट सुनैना की ओर से बताया गया कि ब्रिटिश काल में निर्मित जीआरपी थाना भवन में वर्षों से कोई ठोस मरम्मत या आधुनिकीकरण नहीं हुआ है और वर्तमान में स्थिति अत्यंत खतरनाक बनी हुई है।
जबकि उसी परिसर में रेलवे स्टेशन का करोड़ों रुपये का पुनर्विकास कार्य चल रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़े फोटोग्राफ, समाचार रिपोर्ट और लिखित शिकायत रिकाॅर्ड पर रखीं।
सुनवाई के दौरान केंद्र और रेल मंत्रालय की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को आश्वस्त किया कि संबंधित रेलवे प्राधिकरण जीआरपी थाना भवन की मरम्मत, नवीनीकरण और उन्नयन का कार्य शीघ्र करेंगे, क्योंकि भवन वर्तमान में असुरक्षित स्थिति में है।
अदालत ने दिए गए आश्वासन को रिकाॅर्ड पर लिया
अदालत ने दिए गए आश्वासन को रिकाॅर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया और संबंधित प्राधिकरणों को आवश्यक कार्यवाही पूरी करने के लिए दो माह की समय-सीमा तय की। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि दो माह में कोई सार्थक कार्रवाई नहीं होती, तो याचिकाकर्ता यह सूचित करने के लिए उपयुक्त याचिका दायर कर सकती हैं कि न्यायालय को दिया गया आश्वासन पूरा नहीं किया गया।
कोर्ट ने कहा, बुनियादी ढांचा उपलब्ध न होना विधि के शासन को करता है प्रभावित
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा, पुलिस कर्मियों की गरिमा तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा है। क्योंकि प्रमुख सार्वजनिक परिवहन केंद्र पर तैनात कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को बुनियादी ढांचा उपलब्ध न होना सीधे तौर पर जनहित और विधि के शासन को प्रभावित करता है।
