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स्मार्टसिटी चंडीगढ़ में याद आएगा पुराना दौर, घोड़ा-गाड़ी की तर्ज पर घर तक पहुंचाएगी प्रशासन की ई-रिक्शा

Published: Sun, 18 Oct 2026 12:49 PM (IST)

चंडीगढ़ प्रशासन शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए एक नई योजना ला रहा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मार्च तक ई-रिक्शा सेवा के विस्तार की तैयारी।

  2. शहर में 328 नई इलेक्ट्रिक बसें जल्द ही आएंगी।

  3. मेट्रो के बजाय ई-बस नेटवर्क पर विशेष जोर।

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। स्मार्टसिटी को प्रदूषण मुक्त रखने और ट्रैफिक जाम के झंझाल से बचाने के लिए प्रशासन ने प्लान तैयार किया है, जो कि पुराने दौर की यादें भी ताजा करेगा। पहले घर से निकलते ही घोड़ा-गाड़ी में बैठकर अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच जाते थे। अब प्रशासन इसी तर्ज में अंदरूनी सड़कों पर मुफ्त ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध कराएगा।

इस प्रोजेक्ट को मेट्रो के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें ई-बस सेवा को भी जोड़ा जाएगा। इस समय नगर निगम पहले से सेक्टर-17 प्लाजा में लोगों के लिए मुफ्त ई-रिक्शा चला रहा है।

प्रशासन इस ई-रिक्शा सेवा का मार्च महीने तक विस्तार करने की तैयारी में है, क्योंकि तब तक शहर में 328 नई इलेक्ट्रिक बसें आने के बाद संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। इनके संचालन से डीजल बसों की तुलना में प्रदूषण और शोर कम करने की संभावना है।

मेट्रो के बजाय बस नेटवर्क पर जोर

शहर में मेट्रो परियोजना को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन इसकी भारी लागत और वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्रशासन इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।

कम पार्किंग शुल्क और निजी वाहनों की सुविधा भी शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारणों में शामिल हैं। पहले कंजेशन टैक्स लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन विरोध के चलते इसे लागू नहीं किया गया। प्रशासन के अनुसार ई-बसें और ई-रिक्शा शुरू होने से सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव घटाने और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।

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इस समय चल रही 180 ई-बसें

केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत चंडीगढ़ के लिए कुल 428 ई बसें स्वीकृत की गई थीं। पहले चरण में 100 बसों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। इन बसों की आपूर्ति के बाद शहर में ई बसों की संख्या करीब 180 तक पहुंची है।

इसके बाद बची हुई 328 बसों के लिए अलग से निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। नई बसों का सबसे बड़ा असर स्थानीय यात्रियों पर पड़ सकता है। बसों की संख्या बढ़ने से अधिक मांग वाले मार्गों पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं। नए मार्ग शुरू होने से उन इलाकों को भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिल सकता है जहां अभी बस सेवा सीमित है।

बस क्यू शेल्टरर्स को भी बनाया जाएगा आधुनिक

यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए बस क्यू शेल्टरों (बीक्यूएस) को भी आधुनिक बनाया जाएगा। यहां आइटीएस नेटवर्क से जुड़े सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल चार्जिंग प्वाॅइंट, डस्टबिन और रीयल-टाइम रूट मैप लगाए जाएंगे।

सभी बस क्यू शेल्टर्स पर पैसेंजर इंफाॅर्मेशन सिस्टम (पीआईएस) बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर बसों के आगमन का लाइव समय और अनुमानित आगमन समय (ईटीए) प्रदर्शित होगा। इसके अलावा ई-बस चार्जिंग के लिए 66 केवीए सब-स्टेशन प्रस्तावित है।

मनीमाजरा में नया मिनी बस स्टैंड बनेगा

मनीमाजरा में नया मिनी बस स्टैंड विकसित किया जा रहा है। खुड्डा लाहौरा, धनास, आईएसबीटी-17, सेक्टर-25, आईएसबीटी-43 और रायपुर कलां में ई-बस डिपो प्रस्तावित है। रायपुर कलां वर्कशाॅप को 170 ई-बसों के रखरखाव के लिए विकसित किया जाएगा। यह कार्य दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है।